देश के अति पिछड़े जिलों में शामिल सोनभद्र की दो ग्राम पंचायतों ने केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय की ओर से जारी पत्रिका में जगह बनाई है। दोनों पंचायतों के प्रधान की पहल को सराहते हुए मंत्रालय ने इसे दूसरों के नजीर बताया है।
इन दोनों प्रधानों ने जिले के मेरी प्लास्टिक-मेरी जिम्मेदारी अभियान के तहत अपने गांव को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाया है, जिसका असर भी दिख रहा है।
खास बात यह कि उत्तर प्रदेश से सिर्फ सोनभद्र की इन्हीं दो पंचायतों का उल्लेख पत्रिका में है। इसे जिले के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।सोनभद्र नीति आयोग के उन 112 जिलों में शामिल हैं, जिसे विकास के विभिन्न मापदंडों पर अति पिछड़ा माना गया है।
यहां की भौगोलिक चुनौतियां अन्य जिलाें से अलग हैं। प्रधानमंत्री की अपील पर जिले को प्लास्टिक मुक्त बनाने की पहल शुरू की गई है। ग्राम पंचायतों में हर घर पर बोरे टंगवाए गए हैं, जिसमें लोगों को अपने घर से निकलने वाला प्लास्टिक एकत्रित करना है।
इसे गांव से ब्लॉक और फिर जिलास्तर पर एकत्रित कर निस्तारित करने की योजना है। इसी के तहत रॉबर्ट्सगंज ब्लॉक की ऊंचडीह गांव की प्रधान अर्चना त्रिपाठी ने प्लास्टिक अभियान को महिलाओं की स्वच्छता से जोड़ते हुए अपने गांव में लागू किया है।
इसके तहत प्लास्टिक कचरा एकत्रित कर देने पर पंचायत की ओर से महिलाओं को निशुल्क सेनेटरी पैड उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर घोरावल ब्लॉक के रघुनाथपुर ग्राम पंचायत के प्रधान खुद ई-रिक्शा लेकर रोजाना सुबह घर-घर से कचरा एकत्रित करते हैं।
इन दोनों प्रधानों को पिछले माह जिला स्तर पर पंचायती राज दिवस पर पुरस्कृत भी किया गया था। अब उनके प्रयासों को केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय से प्रकाशित मासिक पत्रिका स्वच्छता समाचार में शामिल किया गया है। इसमें दोनों प्रधानों के प्रयासों का विस्तार से उल्लेख करते हुए सोनभद्र की पहल को दूसरे जिलों के लिए अनुकरणीय बताया गया है।