परीक्षण सफल होने के बाद एनसीएल की बंद गोरबी खदान में बुधवार से राख भरने का कार्य शुरू हो गया। यह कार्य पावर प्रोजेक्टों के लिए बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है। पहले चरण में सब कुछ ठीक रहा तो आगे कोयला निकासी के बाद बंद की गई अन्य खदानों में राख भराव हो सकेगा। इससे राख निस्तारण को लेकर लंबे समय से फिक्रमंद पावर प्रोजेक्ट प्रबंधन को राहत मिलेगी।
एनटीपीसी व एनसीएल के बीच जनवरी-2019 में समझौता ज्ञापन पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके बाद राख भराव पर विभिन्न प्रकार के पर्यावरण अध्ययन करने और विभिन्न वैधानिक प्राधिकरणों से मंजूरी प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू हुई। स्वीकृति के बाद राख निपटान उपकरण स्थापित किए गए। इसी के उपरांत यह परीक्षण पूरा किया जा सका। गोरबी खान वॉयड (पिट-एक) में फ्लाई ऐश निपटान प्रणाली का परीक्षण बुधवार को हुआ। पावर प्रोजेक्ट के अफसरों के मुताबिक यह प्रयोग सफल रहा। इस दौरान बल्कर से फ्लाई ऐश को प्रेशराइज्ड एयर द्वारा हाइड्रो मिक्स चेंबर में ले जाया गया और गड्ढे में डंपिंग के लिए स्लरी में बदल दिया गया। परीक्षण एनटीपीसी विंध्याचल के कार्यकारी निदेशक (विंध्याचल) मुनीश जौहरी, महाप्रबंधक (एनसीएल), महाप्रबंधक (प्रचालन एवं अनुरक्षण), महाप्रबंधक (प्रचालन), महाप्रबंधक (मानव संसाधन), जीएम (एडीएम), जीएम (एमएम), जीएम (रसायन), मुख्य चिकित्साधिकारी (विंध्य चिकित्सालय) एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में सफलता पूर्वक किया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन को चिह्नित करने के लिए एनटीपीसी के अन्य कार्मिक भी उपस्थित रहे।
ढाई दशक से बंद थी कोयला खदान
शक्तिनगर। एनसीएल की जिस गोरबी खदान में राख भराव का कार्य बुधवार से शुरू हुआ वह करीब ढाई दशक पहले साल 1996-97 में बंद कर दी गई थी। कोयला निकासी बंद होने के बाद अनुपयोगी खदान में बने बड़े गहरे तालाबनुमा गड्ढों को राख से भरने पर चर्चा दशक भर पहले शुरू हुई। तमाम बाधाओं को पार करने के बाद पावर व कोल प्रबंधन नतीजे पर पहुंच सके। माना जा रहा है यह प्रयोग भविष्य में राख के उपयोग करके पर्यावरण के अनुकूल परित्यक्त खदान को विकसित करने का एक सुनहरा अवसर खोलेगा।