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बारिश के लिए टोटका: पूर्वांचल में कहीं महिलाओं ने चलाया हल, तो कहीं मेंढक-मेंढकी की शादी कर मांगी गई मन्नत

Sun, 17 Jul 2022 07:26 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र/जौनपुर

सार

आषाढ़ के सूखा रहने और सावन में भी अब तक बारिश के आसार न दिखने से लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है। बारिश के लिए प्रार्थनाओं के साथ टोटके भी शुरू हो गए है।
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पूर्वांचल में बारिश के लिए टोटका - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सावन में भी बारिश नहीं होने से परेशान पूर्वांचल के लोग अब अलग-अलग तरह के टोटके कर रहे हैं। कहीं महिलाएं हल जोत रही हैं तो कहीं मेंढक-मेंढकी की शादी कर बारिश की मन्नत मांगी जा रही है। सूखे की आशंका से चिंतित लोग बारिश के लिए हरसंभव यत्न करने में जुटे हैं।

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आजमगढ़, जौनपुर और सोनभद्र के आदिवासी अंचल में भी रविवार को बारिश के लिए ऐसा ही एक टोटका अपनाया गया। सोनभद्र में धूमधाम से मेंढ़क और मेंढ़की की शादी कराई गई। आजमगढ़ और जौनपुर में विशेष नमाज अदा की गई। जौनपुर के ही चरियाही गांव की विधवा महिलाएं रात में हल चलाकर इंद्र देवता को खुश करने में जुटी हैं। 

मेंढ़क और मेंढ़की की शादी में भरपूर उत्साह
सोनभद्र के आदिवासी अंचल में रविवार को धूमधाम से मेंढ़क और मेंढ़की की शादी कराई गई। बरात निकली, लोग खूब थिरके। फिर दावत का भी लुत्फ उठाया। मान्यता है कि ऐसा करने पर इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और अच्छी बारिश कराते हैं। इस अनूठी शादी का हिस्सा बनने के लिए लोगों में भरपूर उत्साह नजर आया। रनटोला की बैगा बतसिया मेंढक की मां बनीं। उनके घर पर बरात निकालने की रस्में सुबह से ही होने लगी। 

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ढोल नगाड़े के साथ बरात सजी। दूल्हा बने मेंढ़क की नजर उतारी गई। सारी रस्म अदा करने के बाद बरात दो ट्रैक्टरों से रनटोला के प्राथमिक विद्यालय मेनरहवाटोला पहुंची तो यहां भी बरात की अगवानी जोरदार ढंग से हुई। बड़ी संख्या में ग्रामीण यहां से भी बरात में शामिल हुए।

बरात में ढोल नगाड़े के साथ ही डीजे भी था। रास्ते भर गांव के युवा नाचते हुए बरात में शामिल हुए। मुर्धवा-बीजपुर मार्ग पर होते हुए बरात खैराही गांव में लड़की के घर पर पहुंची। खैराही में रामप्यारे बैगा व पत्नी धनपत ने अपनी पुत्री मेढ़की के बरात की अगवानी की। द्वारचार की रस्म के दौरान मेंढक बने दूल्हे को सिर पर सेहरा भी सजा हुआ था।

बारिश के लिए टोटका - फोटो : अमर उजाला
बरातियों को जलपान कराया गया। द्वारचार एवं अगवानी के बाद दोनों का विवाह विधिवत रस्म से किया गया। सिंदूरदान की रस्म के बाद लड़की की विदाई मेंढक के साथ कर दी गई। देर शाम तक लड़की की विदाई कराने के बाद रनटोला के लोग अपने गांव में स्थित बांध में दोनों को छोड़ दिया। आदिवासी क्षेत्र में मान्यता है कि मेंढक और मेढ़की की शादी के बाद बरसात होती है। ऐसे में यह टोटका भी रविवार को चर्चा का विषय बना रहा। 
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जब तक नहीं होती बारिश, जपते रहेंगे राम का नाम

बारिश के लिए टोटकों के साथ लोग पूजन-अर्चन भी कर रहे हैं। बभनी थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत सागोबांध के महदानी घुटरा पहाड़ पर पिछले सोमवार से भगवान इंद्र को खुश करने के लिए लगातार अखंड कीर्तन राम नाम का जाप हो रहा है।

सागोबांध ग्राम प्रधान प्रतिनिधि गोपाल प्रसाद ने कहा कि जब तक भगवान इंद्र नहीं खुश होंगे, तब तक लगातार कीर्तन का जाप होता रहेगा। कोई व्यक्ति 24 घंटे का कार्यक्रम का खर्चा का वहन कर रहा है तो कोई व्यक्ति भोजन-चाय-नाश्ता आदि का प्रबंध कर रहा है। इस तरह से लगातार चल रहे कार्यक्रम को देखने तथा कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कई गांव के लोग पहुंच रहे हैं। कार्यक्रम में मौजूद क्षेत्र के संभ्रांत लोगों का कहना है कि जब तक क्षेत्र में जोरदार बारिश नहीं होगी तब तक हम सभी लोग रामनाम का जाप करते ही रहेंगे। 
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