शक्तिनगर सीमा से सटे मप्र के सिंगरौली में बाघिन टी-60 की मौत टीबी की बीमारी से हुई। यह संयुक्त टीम की ओर से किए गए परीक्षण से स्पष्ट हुआ है। सिंगरौली के डीएफओ अखिल बंसल ने रिपोर्ट की पुष्टि की है।
बीते पांच फरवरी को सीधी स्थित संजय गांधी टाइगर रिजर्व से भटक कर बाघिन सिंगरौली पहुंची थी। टाइगर रिजर्व में उसकी पहचान टी-60 नाम से की जाती थी। बाघिन के पहुंचने से क्षेत्र में दहशत फैल गई थी।
इसी के बाद टाइगर रिजर्व व वन विभाग की पांच टीमों को इसकी निगरानी के लिए लगा दिया गया था। बाघिन के गले में लगी कालर आईडी के जरिए टीमें संयुक्त रूप से सेटेलाइट सिग्नल एवं वेरी हाई फ्रीक्वेंसी (वीएचएफ) द्वारा लोकेशन ट्रैक कर रही थीं।
सोमवार को बाघिन रौंदी वन परिक्षेत्र में मृत पाई गई। मौत की सूचना पर टाइगर रिजर्व के अधिकारियों एवं मुख्य वन संरक्षक रीवा, वन मंडल सिंगरौली के वरिष्ठ अधिकारी, नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) के प्रतिनिधि की मौजूदगी में तीन सदस्यीय जानवरों के चिकित्सकों की टीम ने शव का परीक्षण किया।
फॉरेंसिक जांच के लिए भी सैंपल लिए गए। परीक्षण में पाया गया कि बाघिन लंबे समय से ट्यूबरकुलोसिस (टीबी जैसी बीमारी) से ग्रसित थी। परीक्षण के बाद बाघिन का दाह संस्कार प्रोटोकाल के अनुसार कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि फोरेंसिक जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई पूरी की जाएगी।