जिला मुख्यालय क्षेत्र के लोढ़ी स्थित स्वास्थ्य उपकेंद्र व एएनएम सेंटर बदहाल हो चुका है। यही नहीं, मरम्मत के नाम पर धन खर्च होने के बावजूद भवन की स्थिति बदहाल है। फिर भी जिम्मेदार इससे बेखबर बने हुए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए सरकार की तरफ से कई योजनाएं संचालित हैं। उसी में से एक महत्वपूर्ण योजना है आयुष्मान भारत की हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की व्यवस्था। सुस्ती और उदासीनता के कारण वहां लोगों को इन सेंटरों का कम लाभ मिल पा रहा है।
इस बीच लोढ़ी स्थित स्वास्थ्य उपकेंद्र जिसे हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और एएनएम सेंटर की पड़ताल की गई। तो पता चला कि इसकी हालत बदतर है। भवन की रंगाई-पोताई और मरम्मत पर धन खर्च होने के बाद भी सेंटर की स्थिति ठीक नहीं है।
पड़ताल में सामने आया कि सीएचओ तो आते हैं, मगर सेंटर पर एएनएम नहीं आती है। यहां चहारदीवारी में गेट ही नहीं लगा है। पानी का इंतजाम भी नहीं है। एएनएम एक महीने में एकाध बार ही आती है। सेंटर के दोनों कमरों के बेड पर धूल की मोटी परत मिली।
जिससे बेड का महीनाें से प्रयोग न होने की बात सामने आई। वहीं एक कमरे के बेड पर पुराने खराब कपड़े मिले। तो पुराने पोस्टर भी बेड पर मिले। दूसरी ओर एक कक्ष के बेड पर जला मोबिल, टेबल और मेज पर झाड़ू मिला। कक्ष के कबूतरों की बीट भी काफी मात्रा में थी।
बिजली और पानी के नहीं हैं इंतजाम
सेंटर में बिजली और पानी का भी ठीक इंतजाम नहीं है। शाम होते ही यहां अंधेरा झा जाता है। यहां बिजली कनेक्शन भी नहीं है। कक्षों में लाइट और पंखा भी नहीं लगा है। संदीप, दीपक सहित अन्य स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य उपकेंद्रों और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों का सिर्फ कागजों पर नहीं, धरातल पर चलाने और जिम्मेदारी निभाने से महत्व समझ में आएगा।
सभी केंद्रों पर बेहतर व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए सभी को निर्देशित किया गया है। कहीं की भी शिकायत मिलने पर जांच की जाती है। अगर लापरवाही मिलती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. अश्वनी कुमार, सीएमओ।