बढ़ती सर्दियों में पारेषण लाइनें प्रभावित होने लगी हैं। शनिवार की भोर में पारेषण लाइनों में आई दिक्कत से महज अनपरा परियोजना में 724 मेगावाट की थर्मल बैकिंग कराई गई। लैंको में भी डेढ़ सौ मेगावाट उत्पादन घटवाया गया। इसके चलते सिस्टम कंट्रोल को सूबे के कई हिस्सों में आपात कटौती करानी पड़ी। राज्य एवं निजी सेक्टर की अन्य परियोजनाओं में बिजली उत्पादन बढ़वाकर हालात संभाले गए।
अनपरा से निकलकर उन्नाव, इलाहाबाद, मऊ, सारनाथ, सिंगरौली आदि जगहों के लिए जाने वाली पारेषण लाइनों में तीस नवंबर से दिक्कत आने का शुरू हुआ सिलसिला अभी भी बरकरार है। एक तरफ जहां अनपरा डी की बिजली के चलते 765केवीए वाली उन्नाव लाइन पर रह-रहकर ओवरलोड की स्थिति बनने की बात कही जा रही है। वहीं अन्य पारेषण लाइनों में भी आए दिन कोई न कोई दिक्कत बिजली परियोजनाओं से होने वाले विद्युत उत्पादन में गिरावट का कारण बन रही है। शनिवार की भोर में भी अचानक से चार सौ केवीए की अनपरा-सारनाथ पारेषण लाइन में फाल्ट आ गया। वहीं अनपरा सी-उन्नाव लाइन पर कुछ देर के लिए बनी ओवरलोड की स्थिति को देखते हुए अनपरा परियोजना की ए यूनिट में 123, बी यूनिट में 283, डी यूनिट में 318, कुल 724 मेगावाट की थर्मल बैकिंग शुरू करा दी गई।
लैंको में भी डेढ़ सौ मेगावाट की बैकिंग कराई गई। दोपहर बाद तीन बजे के करीब लैंको में बैकिंग बंद करा दी गई। जबकि अनपरा में छठवीं और सातवीं इकाई में लगातार डेढ़ सौ-डेढ़ सौ मेगावाट उत्पादन घटाए रखने का क्रम जारी थी। अनपरा सीजीएम त्रिभुवन तिवारी ने बताया कि उनकी सभी इकाइयां पूरी क्षमता से उत्पादन के लिए तैयार हैं लेकिन थर्मल बैकिंग के चलते 2630 मेगावाट का लक्ष्य अभी पूरा नहीं हो पाया है। उधर, लैंको यूनिट हेड संदीप गोस्वामी ने बताया कि शक्ति भवन के निर्देश पर डेढ़ सौ मेगावाट की बैकिंग कराई गई। शाम चार बजे से पूरी क्षमता से उत्पादन शुरू कर दिया गया है।
सबसे सस्ती बिजली, फिर भी लगातार थर्मल बैकिंग से उठे सवाल
अनपरा। 2630 मेगावाट वाली अनपरा परियोजना की बिजली प्रदेश में राज्य, निजी दोनों सेक्टर मेें सबसे सस्ती है। इस कारण यहां सबसे अंत में बैकिंग कराई जाती है लेकिन इधर नवंबर के बाद से यहां लगातार बैकिंग कराए जाने का नियम सा बन गया है। शनिवार को भी राज्य सेक्टर की सिर्फ अनपरा परियोजना में वह भी 724 मेगावाट तक की बैकिंग कराई गई। इससे पहले गुरुवार को पांच सौ मेगावाट, शुक्रवार को तीन सौ मेगावाट की थर्मल बैकिंग कराई गई। बता दें कि अनपरा परियोजना तीन रुपये से भी कम में प्रति यूनिट बिजली देता है। जबकि अन्य परियोजनाएं तीन से लेकर छह से सात रुपये प्रति यूनिट बिजली देती हैं। इसको देखते हुए अनपरा की बैकिंग को लेकर जिम्मेदारों पर सवाल उठाए जाने लगे हैं।