प्रदूषित जल अब जीभ और तालू के लिए भी खतरनाक हो गया है। इस कारण मरीजों के जबड़े में पेट और किडनी में होने वाली पथरी की तरह पत्थर बन रहा है। जिला अस्पताल में ऐसा ही एक मामला सामने आया है। घंटे भर चले ऑपरेशन में शनिवार को चिकित्सक ने 10 ग्राम का स्टोन निकाला।
जुगैल थाना क्षेत्र निवासी भागीरथी (60) को भोजन करने में परेशानी होती थी। खाना खाने के बाद मुंह में सूजन हो जाती थी। धीरे-धीरे परेशानी बढ़ने लगी। करीब 15 दिनों पूर्व वे जिला अस्पताल के दंतरोग विभाग में पहुंचे। डॉ. अमृत राय की जांच में सामने आया कि तालू के नीचे पत्थर जैसा कठोर पदार्थ जमा है।
जांच के बाद लार ग्रंथी में स्टोन (सीयलोलिथिएसिस बीमारी) बनना पाया गया। मंगलवार को वृद्ध के मुंह का ऑपरेशन कर पत्थर को निकाला गया। यह दस ग्राम वजन का था। इस तरह का जिले में यह पहला मामला था। दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. अमृत राय ने बताया कि कम पानी पीने या फिर बालू युक्त पानी के लगातार सेवन से कई बार लारग्रंथी में ब्लाकेज हो जाता है।
इस कारण धीरे-धीरे अंदर पत्थर के कड़ इकठ्ठे हो जाते हैं, जो इस बीमारी का रूप ले लेते हैं। उन्होंने बताया कि आपरेशन के बाद मरीज बिल्कुल स्वस्थ है। कहा कि इस बीमारी से बचने के लिए जरूरी है कि स्वच्छ पेयजल को अपनाएं।