दुबेपुर विद्युत उपकेंद्र की बदहाली को लेकर सोमवार को बिजली निगम कर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा। अव्यवस्थाओं और प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ स्टेशन पर कार्यरत लाइनमैनों ने प्रदर्शन करते हुए पानी, सड़क और शौचालय की सुविधा मुहैया कराने की मांग की।
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि दुबेपुर उपकेंद्र पर पहुंचने के लिए करीब 1200 मीटर तक कोई पक्की सड़क नहीं है। कच्चा रास्ता बरसात में यह दलदल बन जाता है, जिससे स्टेशन तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं होता। कई बार खेतों से होकर करीब 200 मीटर पैदल चलना पड़ता है।
ऐसे में किसी खराबी के दौरान उपकरण लाना भी संभव नहीं होता, जिससे विद्युत आपूर्ति बहाल करने में कई दिन लग जाते हैं। कर्मचारियों ने बताया कि बरसात में स्टेशन के चारों तरफ पानी भर जाता है। चार माह तक बाउंड्री भी डूब जाती है। पानी के दबाव से बाउंड्री वॉल गिर चुकी है।
ऐसी स्थिति में जहरीले जंतुओं का खतरा बना रहता है। एक बार तो बड़ा सांप स्विचयार्ड के तारों में फंस गया था, जिससे एक हफ्ते तक विद्युत आपूर्ति ठप रही थी। स्टेशन पर पेयजल की भी कोई व्यवस्था नहीं है। वर्षों पूर्व लगाए गए हैंडपंप अब सूख चुके हैं। कर्मचारियों को दूर से पानी लाना पड़ता है।
अर्थिंग के लिए पानी न मिलने से गर्मियों में बिजली पूरी क्षमता से नहीं मिल पाती। शौचालय न होने के कारण विद्युत कर्मियों को शौच के लिए दूर जाना पड़ता है, जिससे वे यहां रुकना नहीं चाहते। इसका खामियाजा आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है।
कर्मचारियों ने बताया कि करीब 115 किलोमीटर क्षेत्र में पेट्रोलिंग करनी होती है, लेकिन संसाधनों और सुविधाओं की कमी से कहीं भी फॉल्ट होने पर उसे ठीक करने में दो से चार दिन लग जाते हैं। इसके अलावा विद्युत सब स्टेशन से सटी ग्राम समाज की करीब दो बीघा भूमि पर एक काश्तकार ने कब्जा कर लिया है, जिसे खाली कराने की मांग की जा रही है।
विद्युत कर्मियों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही स्टेशन पर पेयजल, शौचालय और पक्की सड़क की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे स्टेशन पर आना बंद कर देंगे। प्रदर्शन करने वालों में रियाज, वासुदेव मिश्रा, दीपक, रामप्रित, अरविंद, उमाशंकर, कृष्ण कुमार, रवि यादव, रोहित आदि कर्मचारी शामिल रहे।