ऊर्जांचल की सड़कों से जाम समाप्त होने का नाम नही ले रहा है। जिला प्रशासन के परियोजनाओं को निर्देश के बावजूद नियमों धज्जियां उड़ाई जा रहीं हैं। शाम के समय वाहन आबादी क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं।
करीब छह माह पूर्व एनटीपीसी शक्तिनगर गेस्ट हाउस में जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह की अध्यक्षता में परियोजनाओं संग बैठक की गई थी। बैठक में जाम व दुर्घटनाओं के कारण और उसे कम करने पर चर्चा हुई।
इस बीच जिलाधिकारी ने एनटीपीसी एवं एनसीएल परियोजनाओं की ओर से उपस्थित प्रतिनिधियों को निर्देशित किया था कि परियोजनाएं कोयला व राख लोड करने का समय ऐसा रखें कि दोपहर तीन बजे के पूर्व रेणुकूट से बाहर निकल जाएं और रात्रि 9 बजे के बाद ही परियेाजनाओं से निकलें।
शाम को ही सबसे ज्यादा कोयला व राख के वाहन हाईवे पर निकलते हैं, जिस कारण शाम के समय बीना से लेकर डिबुलगंज तक जाम की स्थिति बनी रहती है।
काशीमोड़ पर वन विभाग के पास कोल वाहनों की ट्रांजिट कटाने और ट्रांसपोर्टरों के यहां कागज तैयार कराने के लिए वाहनों की कतार लगती है। गश्त के दौरान पुलिस वाहनों को हटवाती है। पुलिस के हटते ही वाहनों की लंबी कतार लग जाती है।
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परियोजनाओं को शाम के समय वाहनों को कम निकलने के लिए निर्देशित किया गया था। अगर शाम के समय कोल व राख के वाहन ज्यादा निकल रहें हैं, तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। - निखिल यादव, उपजिलाधिकारी दुद्धी।