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चुआंड़ के पानी से गला तर कर रहे कुम्हिया के ग्रामीण

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डाला। जिले के 269 गांवों के पानी में फ्लोराइड की मात्रा मानक से अधिक है। सौ से अधिक गांवों के हैंडपंपों से निकलने वाले पानी में आयरन ज्यादा है। पहाड़, जंगल के सौ से अधिक गांव ऐसे हैं, जहां आज भी पानी आसानी से नहीं पहुंच पाता। केंद्र और राज्य सरकार की तमाम योजनाएं यहां के लोगों को शुद्ध पानी मुहैया कराने के लिए चलाई गईं, लेकिन उनका ठीक से क्रियान्वयन न होने के कारण लोगों को लाभ नहीं मिल सका। इसी की देन है कि चोपन ब्लाक के कुम्हिया टोला के ग्रामीण आज भी चुआड़ का पानी पीने के लिए विवश हैं।
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चोपन विकास खंड के पनारी ग्राम सभा स्थित कुम्हिया टोला वाराणसी शक्तिनगर मार्ग से लगभग 13 किलोमीटर दूर पहाड़ियों के बीच है। इस टोले के 10 घर की आबादी में पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। लोग प्यास बुझाने के लिए नाले में बना चुआड़ का गंदा पानी पीने को विवश हैं। टोले के प्रह्लाद, रामदास, रामकिशुन ,रामप्यारे, रामधारी, जयशंकर, सुरेंद्र ने बताया कि दूषित पानी पीने की वजह से कई बार बीमार हो जाते हैं। प्रह्लाद ने बताया कि इस टोले में हम लोगों के घर के पास हैंडपंप नही है। वहीं होरीलाल ने बताया कि कुम्हिया में एक जगह पर एक गांव एक बाग के तहत सोलर पैनल से लोग पानी भरते है। रामकिशन ने बताया कि टोले में एक भी सरकारी हैंडपंप नहीं है जिससे कि हम लोग स्वच्छ पानी पी सकें। विवश होकर चुआड़ का पानी पीना पड़ रहा है।
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