नगवां ब्लॉक के पहाड़ी इलाकों में पानी का गंभीर संकट पैदा हो गया है। खोडै़ला ग्राम पंचायत के महुली गांव के लोग दो किमी की दूरी तय कर पनौरा ग्राम पंचायत के चिचलिक गांव स्थित चुआड़ का दूषित पानी ला रहे। पिछले सप्ताह इस पानी के सेवन से करीब 30 लोग डायरिया और बुखार से ग्रसित हो गए थे।
पहाड़ी गांवों में अब तक टैंकर से पानी की आपूर्ति न होने से गंभीर संकट पैदा हो गया है। डीएम की खराब हैंडपंपों में सबमर्सिबल लगाकर पानी निकालने के निर्देश पर भी अमल नहीं लाया जा रहा है। इससे ग्रामीणों में असंतोष है।नगवां ब्लॉक के पहाड़ी क्षेत्रों में पानी का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।
क्षेत्र के खोड़ैला, बड़ैला, महुली, सोमा, पनौरा, चिचलिक, पल्हारी, सथारी, काशी, ढोसरा, लोढ़ा, दुआरी समेत तमाम ऐसे पहाड़ी इलाके हैं जहां ज्यादातर हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। जो हैंडपंप चालू भी हैं वो गंदा और लाल पानी दे रहे हैं। खोड़ैला की ग्राम प्रधान निर्मला देवी ने बताया कि उनके ग्राम पंचायत में 51 हैंडपंपों में से 21 खराब हैं और 30 चल रहे हैं।
लेकिन ज्यादातर हैंडपंप गंदा और आयरनयुक्त पानी दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि करीब एक सप्ताह पूर्व दूषित पानी पीने से महुली के करीब तीस लोग डायरिया और बुखार से पीड़ित हो गए थे। बताया कि गांव में इस बार एक भी टैंकर नहीं चल रहा जबकि पिछले वर्ष दो टैंकर चल रहे थे। डीएम और बीडीओ को इसके लिए पत्र भी दिया गया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पनौरा प्रधान नगमा बेगम, सोमा के प्रधानपति रामजतन धांगर, ढोसरा प्रधान रामबली अगरिया ने भी टैंकर से पानी की मांग की है।