अनपरा। संयुक्त चिकित्सालय डिबुलगंज में कहीं इलाज के लिए डॉक्टर के पास उपकरण ही नहीं तो कहीं उपकरण होने के बाद भी वह काम नहीं कर रहे। यह अस्पताल लेवल-2 श्रेणी का है। लेकिन यहां तीन साल से अल्ट्रासाउंड मशीन, एक साल से ऑटो एनालाइजर और एक्सरे मशीन चालू नहीं हो सकी है। अस्पताल में सिजेरियन प्रसव हो या फिर दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल मरीज या अन्य किसी मौसमी बीमारी वाले मरीजों को डॉक्टर 100 किलोमीटर दूर जिले के लिए रेफर कर देते हैं। अति गंभीर मरीजों को परिजन निजी साधनों से मध्य प्रदेश के जयंत स्थित नेहरू चिकित्सालय ले जाते हैं, जो काफी खर्चीला होता है।
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन तीन साल से रखी हुई है, लेकिन मशीन को चलाने के लिए न डॉक्टर है और न ही उसका पंजीकरण हो पाया है। इस वजह से गर्भवती महिलाओं को बाहर निजी केंद्रों पर 800 से 1000 रुपये तक खर्च पड़ने पड़ रहे हैं। खून जांच करने के लिए ऑटो एनालाइजर मशीन भी एक वर्ष से रखी है। टेक्नीशियन भी है लेकिन अर्थिंग नहीं होने के कारण अभी तक मशीन चालू नही हो पाई है। हड्डी की जांच के लिए एक्स रे मशीन भी है और टेक्नीशियन भी लेकिन मशीन की क्षमता कम होने के कारण अस्पताल में एक्स रे नहीं होता है।
दांत के डॉक्टर महिला मरीजों को लिखती है दवा
अस्पताल में दांत के डॉक्टर की तैनाती की गई है, लेकिन मरीजों के दांत की जांच और इलाज करने के लिए डेंटल चेयर लंबे समय से उपयोग नहीं होने के कारण खराब हो गई है। अस्पताल में दांत की समस्या वाले मरीज आते हैं, लेकिन उपकरण नहीं होने से उन्हें वापस लौटना पड़ता है और बाहर निजी दांत के डॉक्टरों के यहां ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में महिला डॉक्टर अस्पताल में महिलाओं को दवा लिखती हैं।
अस्पताल में अल्ट्रसाउंड की सुविधा नहीं है। ऐसे में अस्पताल में जांच के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए उन्हें बाहर निजी केंद्रों पर जाना पड़ता है। वहां 800 से एक हजार रुपये तक फीस देनी पड़ती है। -जगन्ननाथ बैसवार।
क्षेत्र में अक्सर लोग दुर्घटना में घायल होने या फिर अन्य किसी कारण से हड्डी की समस्या होने पर अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन वहां हड्डी के डॉक्टर और एक्स रे की सुविधा नहीं होने पर जिले पर या फिर निजी केंद्रों पर जाना पड़ता है, जो काफी खर्चीला होता है। - शंशाक यादव।
बीते होली में मेरे भांजे का विवाद में हाथ टूट गया था। डिबुलगंज स्थित संयुक्त चिकित्सालय ले गए। वहां न एक्स रे हुआ न किसी डॉक्टर ने देखा। निजी साधन से बैढ़न के निजी अस्पताल ले गए। वहां जांच और इलाज में तीन लाख रुपये खर्च हो गए।- राम बदन सिंह।
दांत में दर्द की शिकायत थी। डिबुलगंज स्थित संयुक्त चिकित्सालय गया था। वहां दांत के डॉक्टर के पास गया तो उन्होंने बताया कि उनकी मशीन खराब है। मजबूरी में बाहर निजी दांत के डॉक्टर के यहां इलाज कराया। तीन हजार रुपये खर्च हो गए। - शोभई।
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अल्ट्रासाउंड मशीन का पंजीकरण के लिए आवेदन किया गया है। पंजीकरण होते ही अल्ट्रासाउंड शुरू हो जाएगा। एक्स रे मशीन की मांग की गई है। परियोजना ने सीएसआर से देने के लिए कहा है। ऑटो एनालाइजर मशीन भी जल्द ही शुरू कराया जाएगा। - डॉ. पीके राय, सीएमओ सोनभद्र।