कलेक्ट्रेट से सटे कई गांवों में अब तक सड़कों का निर्माण नहीं हो सका है। यह निर्माण सेंचुरी एरिया होने के कारण रुका है। लोढ़ी से कंडाकोट और बसौली से बहुआर तक की सड़क बन जाए तो आसपास के गांवों का तेजी से विकास हो, लेकिन विभागीय अफसर इसको लेकर संजीदा नहीं हैं।
कलेक्ट्रेट और जिला अस्पताल से सटे एक रोड लोढ़ी के खुशबू नर्सरी पार्क से होते हुए कंडाकोट की ओर जाती है। जबकि एक मार्ग बसौली से बहुआर होते हुए कंडाकोट तक जाता है। इन दोनों मार्गों का निर्माण आजादी के बाद से अब तक नहीं हो सका है। इससे लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। कंडाकोटपहाड़ी पर भगवान शिव की अर्धनारिश्वर मंदिर है। यहां लोग भगवान शिव और गिरजा माता की पूजा करते हैं। यह मंदिर कर्ण ऋषि की तपोस्थली भी मानी जाती है। हर साल वसंत पंचमी और शिवरात्रि पर यहां मेले का भी आयोजन होता है।
कंडाकोट में पूर्व में एक डिग्री कालेज भी संचालित हुआ, जिसका उद्घाटन करने यूपी के तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल वोरा भी यहां आए थे लेकिन सड़क नहीं बनी।
राज्यपाल हवाई मार्ग से ही आए और लौट गए। लोढ़ी से कंडाकोट, छपका से बसौली और बसौली से बहुआर होते हुए कंडाकोट का मार्ग सेंचुरी एरिया होने के नाते नहीं बनाया जा रहा है। कहने को बसौली से बहुआर पीएसी कैंप और नवोदय विद्यालय तक सड़क बनी है लेकिन उसके आगे निर्माण नहीं कराया गया। क्षेत्र के रामचंद्र, पप्पू, मूरली, कुंजबिहारी, कल्लू, हीरालाल और पिंटू का कहना है कि यदि सेंचुरी एरिया वाली इन सड़कों को वन विभाग ही पैरवी कर बनवा देता तो क्षेत्र का विकास होता और लोग विकास की मुख्य धारा से सीधे तौर पर जुड़े जाते।
सोनभद्र वन प्रभाग के डीएफओ एसवीपी सिंह का कहना है कि वन क्षेत्रों में सड़कों का निर्माण नहीं हो सकेगा। इसको लेकर लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। भारत सरकार का वन मंत्रालय वन क्षेत्रों में किसी भी तरह के निर्माण कार्य की मंजूरी नहीं देता है।