राबर्ट्सगंज ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत मझुई में सोमवार को कोटे की दूकान का आवंटन हंगामे की भेंट चढ़ गया। दूकान आवंटित कराने गए एडीओ पंचायत सांख्यिकी को खाली हाथ वापस लौटना पड़ा। ग्राम प्रधान ने पुलिस की मौजूदगी न होना प्रमुख वजह बताया।
नव गठित ग्राम पंचायत में कोटेदार के चयन के लिए सोमवार को पंचायत भवन पर बैठक बुलाई गई थी। ग्राम प्रधान श्याम लाल पाल ने मुनादी कराकर गांव वालों को पहले ही सूचना दे दी थी, जिसके चार सौ महिला, पुरूष पहुंच गए थे। एडीओ सांख्यिकी ओम प्रकाश कुशवाहा और ग्राम विकास अधिकारी नरेश सिंह गांव में पहुंच गए।
कोटे के लिए चार लोगों ने दावेदारी पेश की, जिसमें एक ने नाम वापस ले लिया। शेष तीनों उम्मीदवारों से कहा गया कि वे अपने-अपने समर्थकों के साथ खड़े हो जाएं। समर्थक कतार में खड़े होने लगे। इसी बीच एक दावेदार के कुछ समर्थक जो शव यात्रा से लौटे थे, वे भी कतार में खड़े हो गए। इस पर दूसरे दावेदारों ने आपत्ति जताई और उन्हें हटाने की मांग करने लगे। इसी पर हंगामा खड़ा हो गया।
दोनों गुटों में काफी देर तक कहासुनी होती रही। विवाद की स्थिति देख अधिकारी पंचायत भवन में चले गए और कार्रवाई स्थगित कर दी गई। ग्राम प्रधान श्याम लाल पाल ने कहा कि सुकृत पुलिस से सहायता मांगी गई थी लेकिन पुलिस नहीं पहुंची। पुलिस रहती तो विवाद नहीं होता।