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बेसिक शिक्षा मंत्री जिले के प्रभारी, फिर भी दूर नहीं हुई स्कूलों की दुश्वारी

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सोनभद्र। कायाकल्प योजना के तहत स्कूलों की दशा सुधारने में जिला फिसड्डी हो गया है। पर्याप्त धन और समय मिलने के बाद भी यहां के ज्यादातर स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। न तो स्कूलों में फर्श दुरुस्त हो पाई और न ही बच्चों के बेंच-डेस्क व शौचालय का इंतजाम हुआ है। हाल यह है कि प्रदेश स्तर से जारी कायाकल्प की रैंकिंग में जिला 52वें स्थान पर है। जिले की यह प्रगति तब है, जब यहां के प्रभारी ही बेसिक शिक्षा विभाग के मंत्री हैं।
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ऑपरेशन कायाकल्प के जरिए स्कूलों में कान्वेंट जैसी सुविधाएं देने का लक्ष्य है। वर्ष 2019 में शुरू हुए इस अभियान के तहत स्कूलों में रंग-रोगन, स्वच्छ पेयजल, साफ-सुथरे शौचालय, टाइल्स लगे फर्श, बच्चों के डेस्क-बेंच, बिजली आदि की सुविधाएं मुहैया कराई जानी है। इन जरुरतों को पूरा करने के लिए एनसीएल, एनटीपीसी, हिंडाल्को जैसी बड़ी कंपनियां भी सीएसआर मद से खूब धन दे रही हैं। बावजूद कायाकल्प योजना को सफल बनाने में जिला काफी पीछे रह गया है। कुल 60 प्रतिशत अंकों के साथ प्रदेश में इसे 52वीं रैंक मिली है। हैरानी की बात यह है कि बेसिक शिक्षा मंत्री के जिले का प्रभारी होने के बाद भी परिषदीय स्कूलों की दशा सुधारने में जिम्मेदारों ने कोई रुचि नहीं दिखाई है।
इन सुविधाओं में रह गए पीछे
कायाकल्प योजना से कार्य कराने के लिए कुल 19 बिंदु तय किए गए हैं। स्वच्छ व सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था में जिले को 81 प्रतिशत काम हुआ है। शौचालय उपलब्धता और मल्टीपल हैंड वाशिंग यूनिट स्थापना में भी जिले की प्रगति औसत है। अन्य बिंदुओं में स्थिति बेहद खराब है। महज एक प्रतिशत विद्यालय ऐसे हैं, जहां दिव्यांग मैत्रीय शौचालय का निर्माण हुआ है। कुल 32 प्रतिशत विद्यालय ऐसे हैं, जहां फर्श पर टाइल्स लगाई जा चुकी है। 33 प्रतिशत स्कूलों में ही बच्चों के लिए डेस्क-बेंच की सुविधा हुई है। शौचालय-मूत्रालय में निरंतर नल-जल की उपलब्धता, दिव्यांग बच्चों के लिए रैंप, बिजली कनेक्शन और आपूर्ति के मामले में भी स्थिति काफी खराब है।
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फाइव स्टार हुए 172 स्कूल
कायाकल्प में ओवरआल खराब स्थिति के बावजूद जिले के 172 विद्यालय ऐसे हैं, जिन्हें फाइव स्टार मिला है। यहां कायाकल्प के 19 बिंदुओं के कार्य 90 प्रतिशत से अधिक पूरे हो चुके हैं। कुल 423 स्कूलों को चार स्टार, 854 स्कूलों को थ्री स्टार प्राप्त हुआ है। 289 विद्यालय ऐसे हैं जिनमें कायाकल्प की प्रगति 35 प्रतिशत से भी नीचे हैं। इन्हें सिर्फ एक स्टार हासिल हुआ है। स्टार ग्रेडिंग कायाकल्प के कार्यों के आधार पर किया गया है।
ऑपरेशन कायाकल्प के तहत जिले के कई स्कूलों में बेहतर काम हुए हैं। 172 स्कूलों को फाइव स्टार मिलना इसी का नतीजा है। चार और तीन स्टार वाले विद्यालयों की संख्या भी अधिक है। कुछ तकनीकी दिक्कतों से काम प्रभावित हुए हैं। इसे दूर कर मार्च 2022 की तय समय सीमा तक सभी 19 बिंदुओं पर प्रत्येक विद्यालय को संतृप्त करने का पूरा प्रयास किया जाएगा। -हरिवंश कुमार, बीएसए।
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