सोनभद्र। सौ बेड वाले मातृ-शिशु इकाई (एमसीएच) में भर्ती मरीजों को निजी अस्पताल में भेजकर आर्थिक शोषण की शिकायतों को डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने मामले की जांच के लिए सीएमओ को तीन दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। उधर, सीएमओ ने जांच के लिए दो सदस्यीय टीम गठित की है। जांच शुरू होने के बाद संबंधित चिकित्सकों में खलबली मच गई है।
पिछले माह एमसीएच विंग से एक मरीज को बिचौलियों की मदद से रॉबर्ट्सगंज के निजी अस्पताल ले जाने का मामला सामने आया था। जिस अस्पताल में मरीज को भर्ती कराया गया, वहां के डॉक्टर खुद एमसीएच विंग में तैनात हैं। भर्ती मरीज से काफी पैसा लिया गया। मरीज को बंधक बनाने और फर्जी पुलिसकर्मी बनकर धमकाने के भी आरोप लगे थे। मामला सुर्खियों में आया तो डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने इस पर गंभीरता दिखाते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। पूरे मामले की रिपोर्ट तीन दिन में प्रस्तुत करने को कहा है। उन्होंने इस मामले में सख्त कार्रवाई की बात कही है। इस निर्देश के बाद सीएमओ डॉ. अश्वनी कुमार ने दो सदस्यीय टीम गठित की है। बताया कि प्रकरण की जांच कर 48 घंटे के अंदर रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट आने पर शासन को अवगत कराया जाएगा।
बिचौलियों की सांठगांठ से चल रहे कई अस्पताल
स्वास्थ्य मंत्री की निगाह में आया एमसीएच विंग का मामला कोई नया नहीं है। यहां पहले भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं। सिर्फ एमसीएच विंग ही नहीं मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में भी भर्ती मरीजों को धोखे से निजी अस्पतालों में ले जाने का मामला पहले सामने आ चुका है। इसी खींचतान में कुछ निजी अस्पताल कर्मचारियों में मारपीट भी हो चुकी है। इस पूरे खेल में कुछ डॉक्टरों की भूमिका भी संदिग्ध है। यह डॉक्टर सरकारी वेतन तो लेते हैं लेकिन मरीजों को प्राइवेट उपचार के लिए अपने आवास और निजी अस्पतालों में भेज देते हैं।