आंगनबाड़ी केंद्रों से पोषाहार वितरण के लिए चेहरा प्रमाणीकरण की प्रक्रिया अंतिम तिथि बीतने के बाद भी पूरी नहीं हो पाई है। जिले में कुल 145497 लाभार्थी पंजीकृत हैं। इसमें अब तक महज 50 फीसदी लाभार्थियों का ही ई-केवाईसी और चेहरा प्रमाणीकरण का काम हो पाया है।
वंचित लाभार्थियों के पोषाहार पर संकट आ गया है। दूसरी ओर कार्य में सुस्ती बरतने कार्यकर्ताओं पर भी कार्रवाई की तैयारी है। उन्हें चिह्नित किया जा रहा है।
गर्भवती, धात्री महिलाओं और शून्य से तीन वर्ष तक के बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों से पोषाहार का वितरण किया जाता है। इसमें गड़बड़ी की लगातार शिकायतों के बाद शासन ने ई-केवाईसी की प्रक्रिया लागू की थी।
बाद में इसे चेहरा प्रमाणीकरण (सत्यापन) से भी जोड़ दिया गया। उन्हीं लाभार्थियों को पोषाहार दिया जाना है, जिन्होंने ई-केवाईसी और चेहरा प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इसके लिए विभाग लगातार निर्देश जारी कर रहा है, बावजूद कार्य में गति नहीं आ पा रही है।
शासन ने इस कार्य के लिए 30 जून तक अंतिम तिथि तय की थी। बावजूद करीब 70 हजार लाभार्थियों का सत्यापन पूरा नहीं हो पाया है। इसके पीछे ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की समस्या को भी वजह बताया जा रहा है।
कई लाभार्थियों के आधार में उनके बायोमेट्रिक्स और फ़ोन नंबर अपडेट नहीं है। इसके चलते भी बार-बार प्रयास करने पर उनका ई-केवाइसी सफल नहीं हो पा रहा है।
चेहरा प्रमाणीकरण व ई-केवाईसी के लिए 30 जून की समय सीमा निर्धारित थी। करीब 50 फीसदी लाभार्थियों ने यह प्रक्रिया पूरी कर ली है। कुछ जगहों पर नेटवर्क के कारण दिक्कत आई है। शासन से तय समय सीमा में चेहरा सत्यापन का कार्य पूरा न करने वाले आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सुपरवाइजर व सीडीपीओ को चिह्नित किया जा रहा है। उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
-विनीत कुमार सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी।