सोनभद्र। कफ सिरप तस्करी में शामिल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क (परिवहन के लिए वाहन उपलब्ध कराने वाले) का सोनभद्र एसआईटी ने खुलासा किया है। बिहार होते हुए पश्चिम बंगाल पहुंची टीम ने जिले से 736 किमी दूर हावड़ा में छिपकर बैठे सरगना जुबेर हुसैन शेख को गिरफ्तार किया। जुबेर बांग्लाभाषी चालकों के जरिये बांग्लादेश तक कफ सिरप की तस्करी कराता था।
पुलिस ने बुधवार को उसे वहां की स्थानीय अदालत में पेश किया। ट्रांजिट रिमांड पर उसे लेकर एसआईटी बृहस्पतिवार को सोनभद्र पहुंची। यहां जुबेर हुसैन शेख से हुई पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिलीं। इस नेटवर्क को मदद पहुंचाने वाले पश्चिम बंगाल के कई और नाम सामने आए है। एसआईटी उन सभी के बारे में जानकारी जुटाने में लगी है।
एसपी अभिषेक वर्मा ने बृहस्पतिवार को पुलिस लाइन सभागार में बताया कि फर्जी फर्म बनाकर कागज पर कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी के मामले मेंं सरगना शुभम जायसवाल का नाम सामने आया था। तस्करों के नेटवर्क की पड़ताल करने पर एसआईटी को पता चला कि बिहार के पूर्णिया से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी व कूचबिहार सीमा तक ट्रकों से सिरप पहुंचाया जाता था, जिसे स्थानीय नेटवर्क का इस्तेमाल कर बांग्लादेश भेज दिया जाता था। हर हफ्ते तीन ट्रक सिरप बांग्लादेश की सीमा पर पहुंचता था।
एसपी अभिषेक वर्मा ने बताया कि पटेल नगर चिकल, थाना चिकल, औरंगाबाद (महाराष्ट्र) का जुबेर हुसैन (42) पश्चिम बंगाल में रह कर ट्रांसपोर्ट का नेटवर्क संभाल रहा था। तस्करी के खुलासे के बाद से वह हावड़ा में छिपकर रह रहा था। सूचना मिलने के बाद प्रभारी निरीक्षक ओबरा सदानंद राय, सुकृत चौकी प्रभारी मानवेंद्र सिंह, सर्विलांस सेल के हेड कांस्टेबल प्रकाश सिंह, एसओजी के हेड कांस्टेबल मनीष सिंह की एक टीम हावड़ा भेजी गई। करीब पांच दिन के बाद टीम ने उसे वहां से खोज निकाला।
ट्रांसपोर्ट नेटवर्क में अधिकांश बांग्लादेशी
एसपी के अनुसार, आरोपी जुबेर हुसैन शेख से पूछताछ में शुभम जायसवाल की शैली ट्रेडर्स के जरिये रांची से बांग्लादेश तक कफ सिरप की तस्करी कराए जाने की पुष्टि हुई है। आरोपी अपनी टीम के चालकों के जरिये कफ सिरप को बिहार के पूर्णिया और पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी व कूचबिहार बॉर्डर तक भेजता था। वहां से उन ट्रकों को बांग्लाभाषी चालक बांग्लादेश तक ले जाते थे। ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के गैंग में अधिकतर लोग बांग्लाभाषी शामिल थे ताकि किसी को शक न हो और तस्करी का काम बेरोकटोक आसानी से चलता रहे।
गिरोह के चार सदस्य पूर्णिया, एक झारखंड में हो चुका है गिरफ्तार :
पूछताछ में यह भी पता चला कि पूर्णिया के थाना मारंगा, वायसी व सरसी क्षेत्र में कार्यरत गैंग के वाहन चालक अमीन, फिरोज, सुमेर शेख निवासी औरंगाबाद, महाराष्ट्र और मेरठ इलाके के आदिल को पूर्णिया पुलिस और मेरठ निवासी वसीम को रांची पुलिस पिछले दिनों कफ सिरप तस्करी में ट्रक सहित गिरफ्तार कर चुकी है। जुबेर के जरिये उन सभी की जमानत के लिए रुपये भेजे गए थे। तस्करी से जुड़े नेटवर्क ने सुमेर की जमानत करा ली है। शेष के लिए प्रयास किया जा रहा है।
व्हाट्स एप पर करते थे बातचीत, कोड वर्ड था संपर्क का माध्यम :
एसपी ने बताया कि पूछताछ में पता चला है कि कफ सिरप तस्करी करने के लिए यह गैंग सुनियोजित तरीके से काम करता था। गैंग में शामिल किसी भी ड्राइवर को एक दूसरे से बात करने की इजाजत नहीं थी। कोड वर्ड ही संपर्क का माध्यम था। कभी बातचीत की जरूरत पड़ती तो फोन कॉल की जगह व्हाट्स एप का सहारा लिया जाता था। कफ सिरप का परिवहन करने वाले ट्रक चालकों को इस बात की कड़ी हिदायत गई थी कि अगर कोई पकड़ा जाए तो वह गिरोह के किसी दूसरे सदस्य के बारे में जानकारी पुलिस को उपलब्ध नहीं कराएगा। इसके बदले में उन्हें और उनके परिवार को आर्थिक व कानूनी मदद का भरोसा दिया जाता था। मुनाफे के तौर पर प्रति ट्रक 30 हजार दिए जाते थे। प्रति माह एक टीम दो से तीन ट्रक सिरप बांग्लादेश सीमा तक पहुंचा देती थी। इसके बाद बांग्लाभाषी चालक आसानी से बांग्लादेश पहुंचा देते थे।
पकड़े गए चालकों के परिजनों को ईद पर देने वाला था एक-एक लाख :
बिहार और झारखंड में जो चालक पकड़े गए थे, उनके परिवार के लोगों को आर्थिक मदद के रूप में ईद पर एक-एक लाख रुपये दिए जाने की योजना थी। यह जिम्मेदारी जुबेर की थी। इसके लिए हावड़ा के निकट कल्याणी एक्सप्रेसवे स्थित एक होटल में गिरोह के सदस्यों की बैठक तय की गई थी। एसपी ने बताया कि पश्चिम बंगाल में किनके जरिये इस गिरोह के पास मदद के लिए रुपये पहुंचते थे, इसके बारे में जानकारी मिली है। पूछताछ में वहां के कई नाम सामने आए हैं। सभी के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।