सोनभद्र। सत्ता पक्ष का संरक्षण कहें या रसूख का असर...। हादसे वाली खदान के खिलाफ जांच-कार्रवाई के नाम कई बार अफसर बेबस नजर आए। वर्ष 2022-2023 में खदानों की स्थिति जांचने और पैमाइश का विशेष अभियान चलाया गया था। कई खदान संचालक पेनाल्टी की जद में आए लेकिन यह खदान इससे अछूती रही।
पहले विशेष जांच की जो रिपोर्ट सामने आई थी, उसके मुताबिक जिले की सभी 47 पत्थर खदानों की जांच करने की जानकारी दी गई थी। इसमें नियमों का उल्लंघन बताते हुए मेसर्स सुरेश चंद्र गिरि, मेसर्स साईं राम इंटरप्राइजेज, मेसर्स गनेशाय इंटरप्राइजेज, मेसर्स श्रीराम एसोसिएट्स, मेसर्स बाबा खाटू इंडस्ट्रीज, केडी रिसोर्सेस प्राइवेट लिमिटेड, ओमेक्स मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड, श्री महादेव इंटर प्राइजेज, मेसर्स राधे-राधे इंटरप्राइजेज, मेसर्स श्री बालाजी एसोसिएट्स, मेसर्स श्री स्टोंस, मेसर्स हरिकेश्वर इंटरप्राइजेज, मेसर्स शेषनाथ इंटरप्राइजेज, मेसर्स संतोष कुमार, मां जगदंब इंजीकॉल एनएलपी, लाइफमैप बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स अजय कुमार पांडेय, मेसर्स रामआसरे सिंह, मेसर्स जेएन इंटरप्राइजेज, मेसर्स सुनील से जुड़ी खदानों को लेकर पेनाल्टी लगाया जाना बताया गया। इस सूची में मेसर्स श्री कृष्णा माइनिंग की स्थिति साफ-सुथरी बनी रही। इसके अलावा तत्कालीन खनन निदेशक रोशन जैकब के निर्देश पर चलाए गए विशेष अभियान में जो कार्रवाई सामने आई थी। उसमें मां विंध्य स्टोन क्रासिंग कंपनी, बालाजी स्टोन सहित 12 खदानें शामिल रहीं। इस सूची में भी श्री कृष्णा माइनिंग वर्क्स का नाम नहीं था।