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लहलहाती फसलों पर पड़ी ओलों की मार, सहमे किसान

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बारिश के बाद ओले के टुकड़ों को हाथ में लेकर दिखाता व्यक्ति - फोटो : SONBHADRA
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खेतों में लहलहाती फसलों को देख आह्लादित किसानों के कलेजे पर बृहस्पतिवार को मानों सांप लोट गया। आसमान से हुई ओलावृष्टि ने रबी और दलहनी-तिलहनी फसलों को भारी क्षति पहुंचाई है। मौसम में आए अचानक बदलाव के बाद फसलों के नुकसान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पैदावार गिरने की आशंका से सहम गए हैं। घोरावल और सदर तहसील क्षेत्र के कई इलाकों में बारिश के बाद ओले गिरे। ओलावृष्टि बंद होने के बाद किसान अपनी फसल को सुरक्षित करने की कोशिशों में जुट गए हैं।
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गेहूं के पौधे में वृद्धि का दौर है। फसलों में बाली आने लगी है। किसान अंतिम सिंचाई में जुटे थे। फसलों की बढ़वार देख उन्हें उम्मीद थी कि इस बार पैदावार अच्छी होगी। उनकी उम्मीदों पर बृहस्पतिवार को मौसम ने पानी फेर दिया। दोपहर में अचानक हल्की बारिश के साथ ओले गिरने लगे। करीब 25 से 40 एमएम तक के ओले सात मिनट तक बरसे। गेहूं के अलावा सरसों, चना, मसूर, टमाटर सहित अन्य सब्जी की फसलों को नुकसान पहुंचाया है। बेमौसम बारिश और ओलों से किसान सहम गए हैं। फसल बर्बाद होने का भय है। करमा ब्लाक क्षेत्र के कसया, केकराही, बारी महेवा, रानितरा पगिया, खैराही, पांपी के किसानों की मानें तो सरसों, मटर, अरहर, चना पूरी तरह बर्बाद हो गई है। इनके साथ ही बंजरिया, तेलग, बगही, शिवपुर, रतहरा, जयमोहरा, पुरना कलां, गौरवा, कोरियांव सहित अन्य गांवों के किसानों ने भी इस ओलावृष्टि से फसलों के खराब होने का भय दिख रहा है।
बीमा लाभ के लिए 24 घंटे में दें सूचना
प्रगतिशील किसान लालजी तिवारी ने बताया कि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को काफी क्षति पहुंची है। जिन किसानों ने फसल बीमा करा रखा है, वे क्षतिपूर्ति के लिए 24 घंटे के अंदर सूचना कृषि विभाग के अधिकारियों को दें। किसान संबंधित बैंकों को भी क्षति की सूचना दे सकते हैं। समय से नुकसान के सर्वे के बाद ही मुआवजा मिल सकेगा।
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इस मौसम में बारिश और ओलावृष्टि से सभी तरह की फसलों को नुकसान है। रबी में गेहूं की बालियां ओलों के कारण गिर जाएंगी। सरसों के फूल भी झड़ने से उत्पादन प्रभावित होगा। चना, अरहर, मसूर के अलावा सब्जी की फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। किसान तत्काल बीमा कंपनी को सूचना दें। फसल की स्थिति के आधार पर कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर जरूरी उपाय अपनाएं। -डॉ. पीके सिंह, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र।

बारिश के बाद जमीन पर बिखरे ओले के टुकड़े।- फोटो : SONBHADRA

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