शक्तिनगर। एनटीपीसी शक्तिनगर में हिंदी पखवाड़ा के तहत समूहन कला संस्थान के कलाकारों ने नाटक के प्रभावशाली मंचन से दर्शकों का दिल जीत लिया।
मणि मधुकर की चर्चित रचना ‘किस्सा दुलारी बाई का’ के मंचन को लोगाें ने खूब सराहा। नाटक के जरिये रिश्तों और जीवन की सच्चाई का अहसास कराया गया।
निर्देशक रोज़ी मिश्रा के निर्देशन में हुए इस नाटक ने दर्शकों को रिश्तों और जीवन के असली मायने समझाने का संदेश दिया। नाटक में दुलारी बाई की कहानी है, जो धन और सोने की लालसा में डूबी रहती है। विवाह से भी इसलिए दूर रहती है कि कहीं पति उसकी संपत्ति का अधिकारी न बन जाए।
कथा में मोड़ तब आता है जब कल्लू भांड, राजा का वेष धरकर उससे विवाह कर लेता है। दुखी दुलारी को ईश्वर वरदान देते हैं कि वह जिसे भी छुए, वह सोना बन जाए। यह वरदान धीरे-धीरे अभिशाप बन जाता है। जब वह भोजन करने जाती है तो भोजन भी सोने में बदल जाता है। यही वह क्षण है जब दुलारी को समझ आता है कि रिश्ते और प्रेम ही जीवन का असली धन हैं।
अक्षत कुमार ने कटोरीमल, राजन कुमार झा ने सूत्रधार और पटेल, श्रेयसी सिन्हा व मनी अवस्थी ने दुलारी बाई, जबकि अभिषेक विश्वकर्मा ने कल्लू भांड की भूमिका निभाई। प्रभात कुमार, आलोक कुमार गुप्ता, आकाश पांडेय और चिमना मांझी ने भी अपनी अदाकारी से वाहवाही बटोरी।