रूई की बाती से भाइयों की आयु को जोड़ा
कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि मंगलवार को बहनों ने भाइयों की लंबी उम्र और मंगल कामना के लिए भइया दूज का व्रत रखा। विधि-विधान से पूजन-अर्चन करने के बाद रूई की बाती की माला बनाकर भाइयों की आयु को जोड़ा। इस दौरान दो भजन गाकर और दो कहानी सुनने के बाद सबसे पहले भाई को चना का प्रसाद और भाई को भोजन खिलाया। उसके बाद भाइयों ने बहनों को उपहार दिया
राबर्ट्सगंज विकास नगर की व्रत रखने वाली खुश्बू, सीता, गीता, मंजू, क्षमा, रानी, पूजा ने बताया कि भइया दूज का व्रत भाई की लंबी उम्र और मंगल कामना के लिए रखा जाता है। इसमें दो कलश रूपी घरिया में क्रमश: लाई-मिठाई तथा दूसरे में भीगा चना भरा जाता है। इसके बाद रूई की बत्ती बनाकर उसकी माला बनाई जाती है। मान्यता है कि ऐसा करने से भाई की उम्र लंबी होती है। पूजा-अर्चन दोपहर बारह बजे से पहले करने के बाद बहनों ने भाई को गाली दी और उससे उद्धार के लिए भटकटइया के कांटा से अपनी जीभ छेदी तथा भाई की लंबी आयु के लिएप्रार्थना कीं।
इस व्रत में भाई और बहन दोनों व्रत रहते हैं। बहनें चना से भरी घरिया को भाई को खाने के लिए प्रसाद के रूप में देती हैं। इसे सिर्फ भाई ही खाते हैं, अन्य कोई नहीं खा सकता। इतना ही नहीं भाई के मनपसंद भोजन को भी बहनें बनाकर खिलाती हैं। अंत में भाई अपनी बहन को दक्षिणा देता है और बहन को भी भोजन खिलाकर उसका व्रत तुड़वाता है। इसके बाद बहन भाई की लंबी उम्र और मंगल कामना के लिए दुआ मांगती है।
दुद्धी प्रतिनिधि के अनुसार कस्बे सहित आसपास के क्षेत्रो में मंगलवार को यम द्वितीया, भाई दूज का पर्व धूमधाम से मनाया गया। बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक-चंदन लगा कर उनके लंबी उम्र की कामना की।