अफसरों की मिलीभगत से खनन माफियाओं के सिंडिकेट ने सोन नदी की धारा रोक दी है। अवैध रूप से बालू लदे ट्रकों को नदी से उस पार कराने के लिए ह्यूम पाइप डालकर अस्थाई रूप से पुल बना लिया है। पिछले वर्ष भी इसी साइट पर अस्थाई पुल बनाने का अमर उजाला में खुलासा हुआ था। उसके बाद आगरा के भाजपा के नेता के खिलाफ न सिर्फ अवैध खनन का मुकदमा दर्ज हुआ था, बल्कि खान अधिकारी को छोड़कर यहां का पूरा स्टाफ हटा दिया गया था।
जनवरी में जिले में सात बालू साइटें ई-टेंडरिंग के जरिए हुई थीं। सभी साइटों की 191 करोड़ की बोली लगी थी। मार्च के अंतिम सप्ताह में खेवबंधा और तीन अप्रैल से बरहमोरी और खोखा में बालू साइट शुरू हो गई है। तीनों साइटों पर पोकलेन मशीन से खनन हो रहा है। वहीं बरहमोरी बालू साइट पर ह्यूम पाइप डालकर अस्थायी पुल बनाते हुए रास्ता बना दिया गया है। नदी पर ऐसा पुल या रास्ता किसी भी हाल में नहीं बनाया जा सकता। इससे जलीय जीवों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।
वैसे भी यह इलाका सैंक्चुअरी क्षेत्र से सटा है। यहां एनजीटी के आदेश का उल्लंघन हो रहा है। बताया जाता है कि रास्ता बनने से पहले ओबरा रेंज के वन विभाग के अफसर भी यहां का निरीक्षण कर चुके थे। बावजूद उन लोगों ने पुल निर्माण रोकने की जहमत नहीं उठाई। बताते चलें कि पिछले वर्ष 23 जून को बरहमोरी बालू साइड पर सोन नदी की धारा रोककर अस्थाई पुल बनाने का अमर उजाला में खुलासा हुआ था। उस समय आगरा के एक भाजपा नेता के भाई को यहां ठेका मिला था।
इस नाते जिला प्रशासन मामले को मैनेज करने में जुटा रहा। अंत तक खनन विभाग और जिलाधिकारी के वहां से कहा जाता रहा कि पुल बनाने की परमिशन ली गई है। मगर लगातार तथ्य उजागर होने के बाद न सिर्फ पुल तोड़ा गया बल्कि भाजपा नेता के भाई के खिलाफ अवैध खनन, पोकलेन मशीन का इस्तेमाल और नदी में ह्यूम पाइप डालने के मामले में मुकदमा दर्ज हुआ। कई महीने तक बालू की साइट बंद रही।