वाराणसी खंड स्नातक और शिक्षक चुनाव के लिए शुक्रवार को जिले में 34 बूथाें पर कड़ी सुरक्षा के बीच मतदान हुआ। शिक्षक मतदाताओं का मतदान के प्रति सुबह से ही जोश बना रहा। 75 प्रतिशत से अधिक मतदान कर शिक्षक मतदाताओं ने जहां डिस्टिंक्शन (विशेष योग्यता) प्राप्त की। वहीं स्नातक मतदाताओं का जोश ठंडा दिखा। तमाम कोशिशों के बाद भी मतदान प्रतिशत बमुश्किल 50 फीसदी के आंकड़े तक पहुंच सका। मतदान के दौरान बूथों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। सकुशल और निष्पक्ष ढंग से चुनाव कराने के लिए प्रशासनिक इंतजामों से भी मतदाताओं को राहत मिली।
जिले में शिक्षक खंड के लिए 1738 मतदाता हैं। इन्हें वोट देने के लिए चार विधानसभा क्षेत्रों में 13 बूथ बनाए गए थे। सभी बूथों पर सुबह से ही मतदाता वोट देने के लिए उत्सुक नजर आए। शुरुआती दो घंटे में ही 13.6 प्रतिशत (238) शिक्षकों के वोट पड़ चुके थे। दिन चढ़ने के साथ इनका मतदान प्रतिशत भी बढ़ता गया। शाम 4 बजे मतदान समाप्त होने तक कुल 75.48 प्रतिशत (1312) वोट पड़े थे। वहीं दूसरी ओर स्नातक चुनाव के लिए 21 बूथों पर 16812 मतदाताओं में से सिर्फ 50.21 प्रतिशत (8442) ने ही वोट दिया। स्नातक मतदाता वोट डालने के प्रति सुबह से ही सुस्त नजर आए। दोपहर में कुछ देर के लिए उनके मतदान ने गति पकड़ी।
रॉबर्ट्सगंज के राजा शारदा महेश इंटर कॉलेज, चोपन और दुद्धी के ब्लॉक कार्यालय में बने बूथों पर मतदाताओं की लंबी कतार लगी, लेकिन इसके बाद फिर गति धीमी पड़ गई। राजनीतिक दलों व प्रत्याशियों के समर्थक एक-एक मतदाता से संपर्क कर उन्हें बूथों तक आने के लिए प्रेरित करते रहे। बावजूद मतदान का आंकड़ा किसी प्रकार 50 प्रतिशत तक ही पहुंच सका। मतदान संपन्न होने के बाद सभी बूथों की मतपेटी को सील कर कड़ी सुरक्षा के बीच देर शाम वाराणसी भेज दिया गया।
देखा मन कहीं अउर होई तब दूसरा नंबर वाला दे दिहा...
शिक्षक व स्नातक एमएलसी चुनाव के दौरान प्रत्याशियों के समर्थक एक-एक वोट के लिए जूझते रहे। प्रथम वरीयता के साथ ही दूसरी व तीसरी वरीयता के वोट के लिए भी मतदाताओं से मनुहार करते रहे। वह मतदाताओं से अपने चहेते प्रत्याशी को पहली वरीयता पर रखने के लिए अपील करते रहे। यह भी गुजारिश हो रही थी कि अगर किसी विशेष परिस्थिति या दबाव के कारण वह पहली वरीयता का वोट उन्हें देने की स्थिति में नहीं हैं तो दूसरी वरीयता जरूर दें। रॉबर्ट्सगंज में राजा शारदा महेश इंटर कॉलेज में बने मतदान केंद्र के बाहर वोट देने जा रहे कई मतदाताओं से प्रत्याशियों के समर्थकों को ऐसी अपील करते सुना गया। इस चुनाव में पहली वरीयता के साथ ही दूसरी वरीयता का वोट भी कई बार बेहद महत्वपूर्ण होता है। पूर्व में हार-जीत करने में दूसरी वरीयता वाले वोटों ने अहम भूमिका निभाई है। इसके मद्देनजर हर वोट को पाने की कोशिश जारी रही।
भाजपा और सपा के बीच ही दिखी मजबूत टक्कर
शिक्षक व स्नातक एमएलसी चुनाव में वैसे तो प्रत्याशियों की बड़ी संख्या है। सभी ने अपने पक्ष में माहौल बनाने और जीत के लिए पूरी कोशिश की है, लेकिन जिले में अधिकांश बूथों पर सिर्फ भाजपा और सपा के बीच ही सीधा मुकाबला नजर आया। इन्हीं दोनों पार्टियों के मतदाता भी नजर आए और वोट दिलाने वाले समर्थक भी सक्रिय दिखे। मतदान केंद्रों के बाहर लगे प्रत्याशियों के मतदाता पर्ची वाले बूथ पर भी इन्हीं दोनों जगहों पर अधिक भीड़ थी। हालांकि पढ़े-लिखे और जागरूक वर्ग का मतदान होने के कारण अधिकांश मतदाता अपनी मनोदशों को जाहिर करने से हिचकते भी रहे।
डीएम-एसपी ने मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था परखी
वाराणसी खंड स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन के मद्देनजर डीएम चर्चित गौड़ और एसपी अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने शुक्रवार को जिले के विभिन्न मतदान केंद्रों का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। अधिकारियों ने मतदान को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए संबंधित अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को आवश्यक निर्देश दिए।
डीएम और एसपी ने इंटर कॉलेज ओबरा, विकास खंड चोपन और जय ज्योति उत्तर माध्यमिक विद्यालय चुर्क का निरीक्षण किया। इस दौरान पुलिस बल की तैनाती, मतदाताओं के आवागमन और प्रवेश-निकास मार्गों की व्यवस्था देखी। मतदान प्रक्रिया को सुचारु बनाए रखने के लिए की गई तैयारियों की जानकारी भी ली। एसपी अभिषेक वर्मा ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को निर्धारित स्थानों पर मुस्तैदी से तैनात रहने और मतदान केंद्रों पर अनावश्यक भीड़ नहीं जुटने देने के निर्देश दिए। निर्वाचन प्रक्रिया में बाधा डालने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा। डीएम चर्चित गौड़ ने निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों और आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से पालन कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मतदाताओं को मतदान में किसी तरह की असुविधा नहीं होनी चाहिए। निर्वाचन प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए सभी अधिकारी और कर्मचारी समन्वय के साथ जिम्मेदारी निभाएं।