सोनभद्र। अवैध तरीके से चल रहे अस्पताल आम आदमी के साथ ही साथ कानून व्यवस्था के लिए भी सिरदर्द बने हैं। इनपर कार्रवाई भी बस कागजों तक ही सीमित है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि स्वास्थ्य विभाग ने पिछले माह 15 अवैध अस्पतालों पर केस दर्ज करने के लिए तहरीर दी थी, लेकिन सिर्फ एक पर ही मुकदमा दर्ज किया गया।
जून के अंत में अस्पताल पंजीकरण के नोडल अधिकारी डॉ. जीएस यादव ने जिले के अलग-अलग इलाकों में अस्पतालाें और क्लीनिकों की जांच की थी। कई अस्पताल बिना पंजीकरण और मानक के विपरीत संचालित पाए गए थे। उनके संचालकों को नोटिस जारी की गई। भारी अनियमितता बरतने वाले 15 अस्पतालों के विरुद्ध डाक से तहरीर भेजी थी। हालांकि तहरीर देने के बाद न तो पुलिस ने कोई दिलचस्पी दिखाई और न ही स्वास्थ्य विभाग ने ही प्रभावी पैरवी को उचित समझा। स्थिति यह हुई कि तहरीर के बावजूद 15 में से सिर्फ एक पर ही केस दर्ज किया गया।
इन अस्पतालों के खिलाफ दी गई थी तहरीर
जिन अस्पतालों के विरुद्ध तहरीर दी गई हैं उनमें खलियारी बाजार में एक, राबर्ट्सगंज कचहरी रोड, सलखन बाजार, कोन मार्केट, रामगढ़-कोन मद्रासी दवाखाना,घोरावल में शिवद्वार रोड स्थित क्लीनिक, एक पैथालॉजी, मुक्खा रोड स्थित दो क्लीनिक, फुलवारी घोरावल स्थित एक अस्पताल, विंढमगंज स्थित अस्पताल, विंढमगंज-दुद्धी मार्ग स्थित एक हास्पिटल, चुर्क स्थित बंगाली क्लीनिक सहित कुल पंद्रह अस्पताल हैं। इनमें से सिर्फ एक पर ही केस दर्ज है।
समय-समय पर अवैध अस्पतालों की जांच कर कार्रवाई की जाती है। जुलाई माह में पंद्रह अवैध अस्पतालाें के विरूद्ध केस दर्ज करने के लिए तहरीर दी गई थी। अब केस दर्ज क्यूं नहीं हुआ इसकी जानकारी ली जाएगी। - डॉ. जीएस यादव, नोडल अस्पताल पंजीकरण