सोनभद्र। जिले के एक हजार से अधिक आबादी वाले गांवों और मजरों में जर्जर हो चुके एलटी तार व खंभे बदले जाएंगे। विद्युत निगम की तरफ से इसके लिए कार्रवाई तेज कर दी गई है। प्राइवेट एजेंसी के माध्यम से गांवों में जर्जर तार व खंभे का सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे पूरा करने पर अप्रैल से जर्जर तार व खंभे बदले जाएंगे। इससे गर्मी के दिनों में ग्रामीण इलाकों में निर्बाध रूप से बिजली आपूर्ति की जा सकेगी। अब 250 गांवों का सर्वे पूर्ण हो चुका है।
जिले में कुल 629 ग्राम पंचायतें हैं। किसी ग्राम पंचायतों में चार दशक पहले तो किसी गांव में पांच दशक पहले के बिजली के तार एवं खंभे लगे हैं। कई गांवों में बिजली के तार और खंभे जर्जर हो गए है। ऐसे स्थिति में कभी तार टूटने से तो कभी खंभे टूटने से गांवों में आपूर्ति बाधित रहती है और घटना होने की आशंका बनी रहती है। इसे देखते हुए विद्युत निगम ऐसे गांवों का सर्वे कराकर जर्जर बिजली (एलटी) के तार और खंभे बदलवाने जा रहा है। राबर्ट्सगंज क्षेत्र के अधिशासी अभियंता सर्वेश सिंह ने बताया कि प्राइवेट एजेंसी के माध्यम से एक हजार से अधिक आबादी के गांवों एवं मजरों में सर्वे कराया जा रहा है। राबर्ट्सगंज और चतरा ब्लॉक में सर्वे पूरा हो चुका है। घोरावल और नगवां ब्लॉक में सर्वे चल रहा है, जो मार्च तक पूरा हो जाएगा। दक्षिणांचल में 110 गांवों में सर्वे पूरा हो गया है। अधिशासी अभियंता का कहना है कि मार्च तक जिले के सभी गांवों में सर्वे पूरा कर लिया जाएगा। अप्रैल महीने से गांवों में जर्जर तार और खंभे बदले जाएंगे। उन्होंने बताया कि सर्वे के बाद ही पता चलेगा की कितने गांवों में बिजली के तार व खंभे जर्जर हैं और इसे बदलने पर कितना खर्च आएगा।
बल्ली के सहारे हो रही बिजली आपूर्ति
जिले में अब भी कई गांवों में बॉस-बल्ली के सहारे बिजली की आपूर्ति हो रही है। इससे हमेशा दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। नगवां ब्लॉक के पवनी गांव में 11, पड़री गांव में 14 और नौगांव में 18 बल्ली के लकड़ी के सहारे बिजली आपूर्ति हो रही है। पवनी गांव के ग्रामीणों की मानें तो पूर्व में लकड़ी के खंभे में आग लग चुकी है। इसी तरह अन्य गांवों में भी बांस बल्ली के सहारे बिजली आपूर्ति की जा रही है। तेज हवा चलने पर बल्ली के खंभे टूटने व घटना होने की आशंका बनी रहती है।