मेडिकल कालेज गेट पर धरने पर बैठे छात्र-छात्राएं। स्रोत स्वयं
मेडिकल कॉलेज के एकेडमिक ब्लॉक में नए प्रधानाचार्य की तैनाती के साथ लागू हुए नए नियम और उसके पालन के लिए बनाए गए दबाव से शुक्रवार की शाम छात्र-छात्रा भड़क उठे। प्रतिबंध हटाने, पूर्व की स्थिति बहाल करो, मांगे पूरी करो के नारे लगाते हुए मेडिकल छात्र-छात्राओं का समूह फैकल्टी गेट के बाहर आकर धरने पर बैठ गया। ढाई घंटे बाद पहुंचे प्रधानाचार्य डॉ. आईजेन भट्टाचार्य ने छात्र-छात्राओं से मांगपत्र सौंपने और उस पर कॉलेज की समिति में चर्चा की बात कही, लेकिन वे नए नियम को वापस लेने की मांग पर अड़े रहे।
बताते हैं कि पहले मेस में खाने का पैसा उन्हीं छात्र-छात्राओं को देना पड़ता था, जो उसका उपयोग करते थे। बाहर खाना खाने या छुट्टी के समय का पैसा उन्हें नहीं देना पड़ता था। छात्रों का आरोप था कि अब मेस का उपयोग करें या न करें, सभी छात्र-छात्राओं के लिए उसका भुगतान अनिवार्य बना दिया गया है। इसी तरह गाड़ियों को परिसर से हटाने के आदेश के खिलाफ भी छात्रों ने आक्रोश जताया।
फॉरेंसिक साइंस सहित अन्य फैकल्टी खाली रहने, सभी फैकल्टी में लैब की सुविधा न होने, कई फैकल्टी में एक-एक प्रोफेसर से ही शिक्षण कार्य कराए जाने पर भी नाराजगी जताई।
हॉस्टल में रहना है तो नियमों का पालन करना होगा : प्रधानाचार्य
प्रधानाचार्य डॉ. आईजेन भट्टाचार्य ने कहा कि अनुशासन बनाए रखने के लिए हॉस्टल के कुछ नए नियम बनाए गए हैं। छात्र-छात्राओं से कहा गया है कि सुबह नौ से पांच बजे तक क्लास का समय है। इस अवधि में बाहर जाने की इजाजत नहीं दी जा सकी। जिन्हें शाॅपिंग या कोई खरीदारी करनी है, वह पांच बजे के बाद समूह में बस से बाहर जाएं। सात बजे तक उन्हें लौट आना होगा। शनिवार और रविवार को तीन से चार घंटे (दोपहर तीन से शाम सात बजे या शाम चार से सात बजे) सिटी में जाने की अनुमति रहेगी। परिसर में निजी वाहन की अनुमति नहीं है। कैंटीन में तीन-चार दिन नहीं खाने, बाद में उसका पैसा काट लिए जाने से मेस संचालक को अपने कर्मियों को मानदेय भुगतान में दिक्कत आ रही थी। इसलिए उनसे कहा गया है कि या तो वह बाहर ही खाएं और बाहर ही रहें। कहा कि कोई भी छात्र उनके पास नहीं आया है। नए नियमों की जानकारी दी गई तो वे गेट के बाहर बैठकर शोर मचाने लगे। ऐसे मामलों के लिए कमेटी बनी हुई है। वह मांगपत्र दें। कमेटी उस पर चर्चा करेगी।