सूर्योपासना के महापर्व की शुरुआत रविवार (आज) को नहाय खाय से होगी। सोमवार
को खरना होगा, इसके साथ ही 36 घंटे का कठिन व्रत शुरू हो जाएगा। इसको लेकर
शनिवार को जरूरी तैयारियां जारी रहीं।
राबर्ट्सगंज स्थित नगरपालिका तालाब,
बढ़ौली तालाब, मेहुड़ी नहर, अनपरा क्षेत्र के कहुआनाला स्थित अर्जुन घाट,
अनपरा कालोनी स्थित शिव सरोवर, रेणुसागर स्थित सरोवर, शक्तिनगर स्थित
चिल्का झील, बीजपुर स्थित सरोवर पर छठ पूजा को लेकर तैयारियां जारी रहीं।
रविवार
की शाम व्रती महिलाएं स्नान, पूजन-अर्चन के बाद चावल, चना दाल और लौकी की
सब्जी से बने प्रसाद को ग्रहण करेंगी। इस दिन के प्रसाद में सेंधा नमक का
प्रयोग होगा।
सोमवार को महिलाएं दिनभर व्रत रहेंगी। शाम को विधि-विधान से
स्नान और छठ वेदी बनाकर गुड़ से बनी खीर का प्रसाद भगवान भास्कर को अर्पण
कर उसे ग्रहण (खरना) करेंगी। इसके साथ ही 36 घंटे के कठिन व्रत की शुरुआत
हो जाएगी। मंगलवार (17 नवंबर) की शाम अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देकर पूरी
रात सूर्यदेव और छठ मइया की आराधना की जाएगी।
बुधवार को उदय होते सूर्य को
अर्घ्य देकर ठेकुआ, फल, ईख आदि प्रसाद का वितरण कर पर्व का समापन
किया जाएगा।
बता
दें कि सूर्योपासना का यह पर्व कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी से
सप्तमी तिथि तक मनाया जाता है। इसमें सूर्य षष्ठी को मुख्य पूजा होती है,
जिसे डाला छठ कहा जाता है। सुख-समृद्धि, आरोग्य और संतान प्राप्ति के लिए
इस पर्व का श्रद्धालुओं में विशेष महत्व है।
चूंकि इस पर्व में शरीर और मन
दोनों से साधना होती है, इसलिए इसे पर्व से जुड़े व्रत को हठयोग की भी
उपाधि दी जाती है। ओबरा संवाददाता के अनुसार सेक्टर तीन स्थित बाबा
भूतेश्वर दरबार पर छठ पूजा को लेकर महारूद्र सेवा समिति की बैठक शनिवार को
की गई।
बैठक अध्यक्षता कर रहे नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि रमेश सिंह यादव
ने छठ महापर्व को सकुशल संपन्न कराने हेतु नगर पंचायत से हर संभव व्यवस्था
कराए जाने का आश्वासन दिया।