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यूपी का सबसे बड़ा गांव: विधायकी से भी कठिन है इस गांव की प्रधानी, हर टोले तक पहुंचने में लग जाते हैं महीनों

Fri, 20 Jun 2025 10:49 AM IST
प्रगति चंद मनीष जायसवाल, अमर उजाला ब्यूरो, सोनभद्र।

सार

Sonbhadra News: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में एक गांव ऐसा भी है, जो 75 टोले में बसा है। भौगोलिक रूप से यह गांव यूपी का सबसे बड़ा गांव है। ऐसे में अपने ही गांव के हर टोले तक पहुंचने में काफी समय लग जाते हैं। 
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यूपी का अनोखा गांव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कहावत है कि विधायक बनना आसान है, लेकिन प्रधान बनना मुश्किल। सोनभद्र के कई गांव इसे सच साबित करते हैं। यकीन नहीं हो सोनभद्र के जुगैल गांव में चले आइए। यहां चुनाव लड़ने में ही आपके छक्के छूट जाएंगे।

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भौगोलिक रूप से यह यूपी का सबसे बड़ा गांव है। कुल 75 टोलों में बसे इस गांव के एक से दूसरे छोर की दूरी 28-30 किमी है। यह दायरा इतना बड़ा है कि इससे छोटे प्रदेश के कई विधानसभा क्षेत्र हैं। अपने ही गांव के हर टोले तक पहुंचने में महीनों लग जाते हैं।

वर्ष 2020 के पंचायत चुनाव में यहां कुल 17342 मतदाता थे। अब यह संख्या 23 हजार तक पहुंच गई है। गांव की आबादी करीब 40 हजार है। राजस्व रिकॉर्ड में एक ही गांव होने के कारण यहां लेखपाल भी एक हैं और सफाई कर्मचारी भी एक। आदिवासी बहुल इस गांव के कई टोले में अब तक सड़क नहीं बन पाई है।
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इस गांव में एंबुलेंस जाना भी मुश्किल

पौसिला टोला ऐसा है, जहां एंबुलेंस जाना भी मुश्किल है। गरदा, घोड़ाघाट, भटवा टोला, सेमरा जैसे सुदूर के इलाकों में सड़क तो बन गई, लेकिन नेटवर्क नहीं है। अन्य सुविधाएं का भी टोटा है। ग्राम पंचायत के पास बजट सीमित है, जबकि जरूरत कई गुना ज्यादा है। पंचायत से छोटे-छोटे काम हो जाते हैं, लेकिन बड़े कार्यों के लिए विशेष बजट की दरकार रहती है। बड़े भौगोलिक क्षेत्रफल के चलते ही यहां चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी अधिकांश क्षेत्रों में पहुंच ही नहीं पाते। 

अधिकारी बोले
जुगैल, पनारी, कोटा जैसी बड़ी ग्राम पंचायतों में आबादी के अनुसार ही बजट मिलता है। पंचायत भवनों के माध्यम से जन सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। नमिता शरण, डीपीआरओ 

बड़ी ग्राम पंचायतों के विभाजन के लिए पूर्व में प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन ब्रिटिश काल से यह रिकॉर्ड में एक ही राजस्व ग्राम के रूप में दर्ज हैं। -जगरूप सिंह पटेल, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी 

लगाते हैं जनता दरबार

प्रधान सुनीता देवी बताती हैं कि बड़ा गांव होने से लोगों तक पहुंचने में दिक्कतें तो आती हैं, लेकिन उसके समाधान के लिए जनता दरबार की व्यवस्था की गई है। रोजाना पंचायत भवन पर सुबह 7 से 1 बजे तक सुनवाई की जाती है। सभी को इसकी सूचना है, लिहाजा ग्रामीण उस वक्त आकर अपना काम कराते हैं। ज्यादातर टोले तक सड़क बन चुकी है। इससे जरूरत पर वाहन से पहुंच जाते हैं। बताया कि पूर्व में इसे छोटा करने का प्रयास हुआ था, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में ही एक गांव होने से बात नहीं बन पाई।
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64 टोलों का गांव पनारी, यहां पांच रेलवे स्टेशन

चोपन ब्लॉक का ही पनारी भी अपने आप में अनूठा गांव है। जुगैल के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा गांव है। 2020 में 16344 मतदाता थे, जो 21 हजार तक पहुंच चुके हैं। आबादी भी 35 हजार के आसपास है। 64 टोलों वाले इस गांव का दायरा भी 20 से 22 किमी तक है। यह ऐसी ग्राम पंचायत है, जिसमें पांच रेलवे स्टेशन सलईबनवा, फफराकुंड, मगरदहा, ओबरा डैम और गुरमुरा है। इस गांव से नौ बीडीसी सदस्य चुने जाते हैं। अदरा कूदर, छत्ताडांड, ढोढहार जैसे टोलों में स्कूल और बिजली भी नहीं है, जबकि हर टोले में करीब 700 की आबादी है। ग्राम प्रधान लक्ष्मण यादव का कहना है कि एक से दूसरे टोले की दूरी 5-6 किमी है। 
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