सोनभद्र। देश के तीसरे सर्वाधिक प्रदूषित क्षेत्र का दर्जा रखने वाले सिंगरौली रीजन (सोनभद्र और सिंगरौली) में दीपावली के बाद वायु प्रदूषण में तेजी से इजाफा हुआ है। एक दिन पहले 142 पर रहने वाला वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) मंगलवार को 219 पर जा पहुंचा। विशेषज्ञों का दावा है कि प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह प्रदूषण दस सिगरेट पीने के बराबर है। सर्दी बढ़ने के साथ ही छाने वाला धुंध इसमें और बढ़ोत्तरी करता दिखाई देगा।
सोनभद्र एक ऐसा जनपद है जहां की सिर्फ हवा ही नहीं, मृदा और जल भी जहरीला हो चुका है। फ्लोराइड, नाइट्रोजन जैसे खतरनाक रासायनिक तत्वों के अलावा बड़े क्षेत्र में मरकरी की अत्यधिक मात्रा लगातार जनस्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है। हालात को देखते हुए केंद्र सरकार की तरफ से संचालित राष्ट्रीय हवा स्वच्छता कार्यक्रम के तहत जिले के अनपरा को कार्ययोजना में शामिल किया जा चुका है लेकिन अभी भी वायु प्रदूषण यहां बड़ी समस्या बनी हुई है। हालत यह है कि दीपावली के एक दिन पूर्व यानी 27 अक्तूबर को जो एक्यूआई (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जारी आंकड़े) 142 था। वह 28 अक्तूबर को 217 और 29 अक्तूबर को 219 पर पहुंच गया। सामान्यता इसे दीपावली पर पटाखे के शोर का परिणाम भले ही माना जाए लेकिन विशेषज्ञों की राय में इसका बड़ा कारण लगातार बिजली आपूर्ति की जरूरत को पूरा करने के लिए पूरी क्षमता से जलाए गए कोयले (बिजली परियोजना का संचालन) और उससे उत्सर्जित हुए राख एवं अन्य औद्योगिक अवशिष्टों का प्रभाव है। इसी तरह विशेषज्ञ हवा में प्रति घनमीटर पाए जाने वाले 21.6 माइक्रोग्राम प्रदूषक तत्वों की मात्रा को एक सिगरेट के बराबर मानते हैं। इस हिसाब से अगर 219 के आंकड़े को देखें तो यह दस सिगरेट के बराबर बैठता है। बताते चलें कि भारतीय मानक के अनुसार 60 से ऊपर एक्यूआई पहुंचने पर मानव स्वास्थ्य प्रभावित होने लगता है। सौ तक स्थिति नियंत्रित रहती है। इससे उपर का आंकड़ा तेजी से लोगों को बीमार बनाना शुरू करता है। दो सौ से उपर के आंकड़े को गंभीर चेतावनी के तौर पर देखा जाता है। यहीं आंकड़ा जब तीन सौ के उपर पहुंचा तो हालात को मानव स्वास्थ्य के लिए आपातकाल के रूप में देखा जाने लगता है।