सोनभद्र। जिले में संचालित औद्योगिक कंपनियों और खनन उद्योग से वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर है। स्थिति यह है कि डाला बाड़ी क्षेत्र में क्रशर प्लांटों से उड़ने वाले धूल से लोगों को सड़क पर सब कुछ धुंधला नजर आता है। दक्षिणांचल में कोयला उत्पादन वाले क्षेत्रों में भी वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर है। ऐसे में केंद्र सरकार की तरफ से पेश बजट में वायु प्रदूषण की समस्या पर नियंत्रण के लिए 2217 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाना सोनभद्र के लिए राहत भरा हो सकता है।
जिले में प्रदूषण की गहराती समस्या लोगों को काफी परेशान करती जा रही है। लोगों के फेफड़ों में संक्रमण तो बढ़ ही रहा है, आंख भी प्रभावित हो रही है। लोग वायु प्रदूषण से विभिन्न तरह की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। कोन, दुद्धी, म्योरपुर और अनपरा क्षेत्र के बरबी, सिरसोती, पिपरी सोनवानी, पंचेपेडिया, पडरछ, मूर्ता, लोझरा, कुड़वा, कुदरी, खरहरा, कहरिया, कैम्हापान, गड़िया, जोगेंद्रा, जामपानी, गुलालीडीह, गोठानी और डोड़हर आदि क्षेत्रों में वायु प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर डाल रहा है। बाड़ी, बेलवादह, बीजपुर, डड़िहरा, डगडउवाटोला, डहकूडंडी, डुमरहर, गरबंधा, गुलालझरिया, जरहां, कजरहट, कनछ, कटौंधी, केवाल, कोहराौल, कूड़पान, मकरा, मुनगाडीह, नगवां, नवटोलिया, निमियाडीह, निंगा, सतबहनी और सुखड़ा क्षेत्र में भी लोग वायु प्रदूषण के कारण तरह-तरह की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। जिला अस्पताल से हाल ही में सेवानिवृत्त हुए पूर्व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पीबी गौतम का कहना है कि ऐसे में सोमवार को पेश किए गए देश के आम बजट में वायु प्रदूषण की समस्या पर नियंत्रण के लिए 2217 करोड़ रुपये का प्रावधान किये जाने से जिले के लोगों को वायु प्रदूषण की समस्या से राहत मिलने की संभावना है। उनका कहना है कि वायु प्रदूूषण से फेफड़े, आंख, गले को नुकसान पहुंचता है। सांस की बीमारी हो सकती है। एलर्जी, सिरदर्द और बुखार भी हो सकता है। इससे बचने के लिए लोगों को फेस मॉस्क लगाना चाहिए और बार-बार हाथों को सैनिटाइज करते रहना चाहिए।