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रुपयों के लालच में खदानों को बना दिया खाई

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ओबरा बिल्ली मारकुड़ी स्थित खदान।
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सोनभद्र। बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र के अधिकांश खदानों में मानकों की अनदेखी कर खनन कार्य कराए गए है। मामला संज्ञान में आने पर प्रशासन ने खाई बन चुकी खदानों को पटवाने की दिशा में पहल शुरू कर दी है। खनिज विभाग ने ओबरा एवं अनपरा तापीय परियोजना को खाई के रूप में तब्दील हो चुकी 60 खदानों में फ्लाई ऐश एवं मिट्टी भर कर पौधरोपण कराने के लिए रिपोर्ट भेजा है।
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बताते चले कि चोपन और ओबरा थाना क्षेत्र के 85 से अधिक पत्थर की खदानें 50 फीट से अधिक गहरी हो चुकी है। पूर्व में खनन सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर खदानों में खनन कार्य कराए गए है। इतना ही नहीं कई खननकर्ताओं ने बिजली के टावरों, रेलवे लाइन पटरियों के समीप तक खनन करा दिए है। अक्सर किसी न किसी खदानों में खनन कार्य के दौरान हादसे होते है। वर्ष 2012 में बिल्ली-मारकुंडी की एक खदान धसकने से कई श्रमिकों की मौत हो गई थी। उस वक्त तैनात रहे डीएम और एसपी ने शासन को पत्र भेजकर अवगत कराया था कि जिले की खदानें काफी गहरी हो चुकी है, इस नाते खनन कराना उचित नहीं होगा। इसी के चलते कई माह तक खनन बंद रहा। लेकिन सपा सरकार ने अधिकांश खदानों मेें खनन कार्य शुरू करा दिया और पट्टेधारकों ने मनमाने ढंग से खनन कार्य कराया। बरसात में खदानों में पानी भर जाता है। जिला प्रशासन ने अत्याधिक गहरी हो चुकी खदानों को पाटकर पौधरोपण कराने की दिशा में पहल शुरू कर दी है। इस संबंध में जिला खान अधिकारी केके राय ने बताया कि ओबरा और अनपरा तापीय परियोजना को 60 खदानों में फ्लाई ऐश भरकर उसमें चार फीट मिट्टी पाटकर पौधरोपण कराने के लिए पत्र भेज दिया गया है।
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