सोनभद्र। नगर के आरटीएस क्लब में चल रहे श्रीराम चरित मानस नवाह़् पाठ महायज्ञ में सातवें दिन बृहस्पतिवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। कड़ाके की ठंड होने के बावजूद श्रद्धालुओं ने यज्ञमंडप की परिक्रमा कर मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम की भव्य झांकी का पूजन-अर्चन किया। 111 भूदेवों द्वारा किए जा रहे वैदिक मंत्रोचार से समूचा इलाका भक्तियम हो गया।
गोरखपुर से पधारे पंडित हेमंत त्रिपाठी ने भारतीय राजनीति की रामचरित मानस में देखने को मिलता है। प्रभु श्रीराम और माता जानकी के मध्य जो संधि हुई उसका मर्म लक्ष्मण भी नहीं जान सकें। जबकि साथ में हमेशा रहते थे। संधि करके जनक नंदनी सीता अग्रि में समाहित हो जाती है। उत्तराखंड ऋषिकेश से आए पंडित देवी प्रसाद ने जयंत के प्रभाव को श्रीराम से जोड़बर बताया। कहा कि वर्तमान में भी ऊंचे पद पर पदासीन व्यक्तियों के बेटे ही इंद्र के बेटे जयंत की तरह चोंच मार रहे है। जौनपुर के पंडित धर्मराज शास्त्री ने भरत चरित्र की सुंदर ब्याख्या की। इसके पूर्व यज्ञाचार्य सूर्य लाल मिश्र ने सुंदरकांड का पाठ कराया। संचालन कर रहे आचार्य संतोष द्विवेदी ने कहा कि जिस दिन से घर में बुजुर्गों की बात नौजवानों को अच्छी लगने लगे उसी दिन से मानों सुंदरकांड शुरू हो गया। सुंदरकांड में महामंत्री सुशील पाठक, राहुल पाठक, शिशु तिवारी, महेश दूबे, किशोर केडिया, मिठाई लाल सोनी, बिमलेश सिंह, राजेश्वर शुक्ल, मन्नू पांडेय, सुधाकर दूबे आदि मौजूद रहे।