सोनभद्र। हाल ही में राज्य राजमार्ग का दर्जा पाए खलियारी-मड़िहान मार्ग के निर्माण के लिए किसी का आशियाना नहीं तोड़ा जाएगा। कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग की तरफ से इसको लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी गई है। विभाग के लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए जितनी जमीन चाहिए उतनी जमीन खाली है या उस पर सड़क बनी हुई है। इससे आवास बनाकर रह रहे लोग प्रभावित नहीं होंगे।
सपा सरकार में घोरावल के विधायक रहे इं. रमेश चंद्र दूबे ने शासन स्तर पर मड़िहान-खलियार राज्य राजमार्ग का निर्माण कराने की मांग उठाई थी। लेकिन वर्ष 2017 में सूबे में भाजपा सरकार बनने के बाद सड़क के निर्माण की मांग ठंडे बस्ते में चली गई। लेकिन वर्ष 2018 में सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं ने शासन स्तर पर खलियारी-मड़िहान मार्ग को राजमार्ग की दर्जा दिलाने की पहल शुरू की। योगी सरकार ने राजमार्ग बनाने के लिए हरी झंडी दे दिया। राबर्ट़्सगंज, घोरावल, शाहगंज, रामगढ़ समेत अन्य कस्बों के मध्य से सड़क गुजरने से हजारों लोगों को खुद का आशियाना टूटने का भय सताने लगा और वे लोग कस्बों के बाहर से बाईपास सड़क बनाने की मांग करने लगे। मामले को सदर विधायक भूपेश चौबे ने विधान सभा में भी उठाते हुए बाईपास बनाए जाने की मांग की। राजमार्ग के विरोध में उठ रहे स्वर को देखते हुए कार्यदायी लोक निर्माण विभाग ने सड़क निर्माण को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन प्रकाश चंद्र का कहना है कि करीब सात मीटर चौड़ा मिर्जापुर के मड़िहान से खलियारी तक राज्य राजमार्ग सड़क का निर्माण कराया जाना है। जिले में पहले से ही सड़क निर्माण के लिए जितनी जमीन चाहिए उतनी भूमि खाली है या उस पर सड़क बनी हुई है। सड़कों के किनारे आवास बनाकर रह रहे लोगों के मकानों को सड़क निर्माण के लिए धराशायी किए जाने की बात झूठी है। उन्होंने कहा कि सड़कों के पटरियों और नालियों पर हुए अतिक्रमण को हटाया जाएगा।