1200 मेगावाट की लैंको परियोजना कोयले की किल्लत के कारण सुपर क्रिटिकल में पहुंच गई है। इससे प्रदेश में सस्ती बिजली उपलब्ध कराने वाली इस परियोजना से बिजली उत्पादन कभी भी ठप हो सकता है। कोयला किल्लत की वजह गंभीर आर्थिक संकट बताया जा रहा है। भुगतान न होने के कारण एनसीएल की कोयला खदानों से कोयला आपूर्ति प्रभावित हो गई है।
लैंको परियोजना द्वारा यूपी पावर कारपोरेशन को बेची गई बिजली का बकाया भुगतान न किए जाने से यह स्थिति पैदा हुई है। यूपी पॉवर कारपोरेशन और डिस्काम के ऊपर लैंको अनपरा सी समेत कई बिजली घरों से खरीदी गई बिजली का कई हजार करोड़ रुपये बकाया है। लैंको परियोजना प्रबंधन के अनुसार यूपी पॉवर कारपोरेशन के अधिकारियों से वार्ता की जा रही है।
एक दो दिन के अंदर भुगतान नहीं किया गया तो परियोजना को बंद करने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचता है। ऐसे मे यदि परियोजना से बिजली उत्पादन ठप होता है तो लैैंको परियोजना सहित प्रदेश को सस्ती बिजली मुहैय्या कराने वाली इस परियोजना को पुन: चालू करने में परियोजना प्रबंधन को काफी नुकसान होगा, वहीं प्रदेश में बिजली किल्लत भी पैदा हो सकती है।
परियोजना के पास दो दिन से भी कम कोयले का स्टाक बचा है। गाइड लाइन के अनुसार सात दिन का कोयला स्टाक होने की स्थिति में परियोजना क्रिटिकल में मानी जाती है, जबकि चार दिन से कम कोयला स्टाक होने पर इसे अति गंभीर श्रेणी यानी कि सुपर क्रिटिकल में माना जाता है। किसी भी परियोजना में कम से कम 10 से 15 दिन का कोयला स्टाक होना चाहिए। मंगलवार तक कोयले की आपूर्ति यदि नहीं होती है तो परियोजना से बिजली उत्पादन ठप हो सकता है।