सोनभद्र। जिले के 63 अति पिछड़े गांव में मोबाइल टावर लगाने का शासन को भेजा गया प्रस्ताव वर्षों से डंप पड़ा है। पुलिस महकमे ने नक्सल गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दृष्टि से 145 स्थानों का चयन किया था, जिसमें मोबाइल टावर लगाए जाने थे। लेकिन आजादी के 73 साल गुजर जाने के बाद भी इन इलाकों के रहवासियों को मोबाइल नेटवर्क की सुविधा मुहैया नहीं हो सकी। इससे सूचनाओं का आदान-प्रदान नहीं हो पता।
केंद्र और प्रदेश सरकार नक्सल प्रभावित सोनभद्र में विकास कार्य कराने के नाम पर पानी की तरह धन खर्च कर रही है। बावजूद इसके नगवां ब्लॉक के 28 गांव, बभनी ब्लॉक के 1 गांव, चोपन विकास खंड के 30 गांव और म्योरपुर विकास खंड के चार गांवों में संचार व्यवस्था का प्रबंध नहीं हो सका है। इन गांवों में किसी भी कंपनी के मोबाइल का नेटवर्क काम न करने से रहवासी तबीयत खराब होने पर एंबुंलेंस एवं अपराधिक घटनाओं की सूचनाएं पुलिस को नहीं दे पाते है। पुलिसकर्मी समेत अन्य विभागों के कर्मी भी सूचनाओं का आदान-प्रदान कर पा रहे हैं। पड़ोसी बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में नक्सलियों की सक्रियता को देखते हुए वर्षों पूर्व पुलिस प्रशासन और बीएसएनएल ने 63 गांवों में 145 स्थानों पर मोबाइल टावर लगाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा, लेकिन अभी तक टावरों को लगाने के लिए मंजूरी नहीं मिली है। इस संबंध में भारत संचार निगम लिमिटेड के एसडीओ धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि 145 टावरों को लगाने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। वहां से मंजूरी मिलने के बाद टेंडर की प्रक्रिया पूर्ण कराते हुए टावरों को लगवा कर ग्रामीणों को सुविधाएं मुहैया कराने का कार्य किया जाएगा।
जिन गांवों में नेटवर्क की समस्याएं है उनकी सूची तैयार कराई गई है। उनके स्तर से शासन को पूर्व में टावरों को कगवाने के लिए भेजे गए प्रस्ताव को हरी झंडी दिए जाने के लिए पत्राचार किया जाएगा। ताकि ग्रामीणों को नेटवर्क की समस्या से निजता मिल सकें।
आशीष श्रीवास्तव
पुलिस अधीक्षक