जानकारी के मुताबिक बघाड़ू में जनजाति समाज से जुड़ी रहीं महज दो महिलाओं के जरिये बहादुर और उनसे जुड़े परिवार, रिश्तेदार और परिचितों ने 48 बैनामे करवाए। धारा 80 के जरिये जमीन की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया अपनाई गई। इन बैनामों को निरस्त करने के लिए तहसील न्यायालय में वाद दाखिल करते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया गया है। नियम विरुद्ध ढंग से हुई खरीद-बिक्री को रद्द करते हुए प्रशासन भूमि का सरकारी खाते में दर्ज करने की तैयारी में है।
नन्हकी कभी कोरची तो कभी सिंदुरी की निवासी बनकर कराती रही बैनामा
एक तरफ बहादुर अली की पत्नी रजिया को अनुसूचित जनजाति की महिला दर्शाते हुए बघाड़ू में 34 जमीनें (लगभग 38 बीघे) बैनामा करवाई गईं। वहीं कथित नन्हकी को कभी सुंदरी तो कभी कोरची का निवासी बताते हुए 14 बैनामे (7 बीघे से अधिक) कराए गए।