ऐसे उठा रहे नाम का लाभ
रजिया का पूरा नाम परिवार रजिस्टर, आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र सहित अन्य दस्तावेजों में अलग-अलग कहीं रजिया, रजिया खातून तो कहीं रजिया पनिका है। अपनी जरूरत के अनुसार इन नामों का उपयोग किया जा रहा है। रजिया के पिता जनजाति वर्ग से थे, लिहाजा उसकी जाति भी जनजाति की है। इसी का फायदा उठाकर पिता के नाम-पते का सहारा लेकर दूसरे जनजातियों की जमीन खरीदी जा रही है।
खरीदी गई इन जमीनों की देखभाल व मालिकाना हक उसके पति बहादुर अली का है। सूत्रों के मुताबिक बहादुर अली ने बाहर से आए लोगों को अपने रिश्तेदार, परिचित बताकर 100 रुपये के स्टांप अनुबंध के तहत जमीन पर बसाया है। बदले में उनसे जमीन की मूल कीमत भी वसूली गई है। इस पूरी प्रक्रिया में कोई कानूनी दिक्कत नहीं है। लिहाजा सरकारी तंत्र की नजर भी इस पर नहीं पड़ी है।
एसडीएम की प्राथमिक जांच में ही सामने आए कई चौंकाने वाले तथ्य
सीएम तक पहुंची शिकायत के बाद एसडीएम दुद्धी की एक प्राथमिक जांच में कई जानकारियां सामने आई है। उसमें जिक्र किया गया है कि बहादुर की दूसरी पत्नी रजिया पनिका के नाम खरीदी गई जमीन सात नजदीकी रिश्तेदारों को घर बनाने के लिए दी गई है। एक घर बन गया है। छह निर्माणाधीन है।
संबंधित महिला के भाई के नाम पर भी जमीनें खरीदी गईं। धारा 80 के जरिए जमीन को अकृषिक घोषित कराकर भी कई को जमीन बेची गई। दूसरी महिला जिससे शादी तो रचाई गई लेकिन सार्वजनिक तौर पर इसका एलान नहीं किया गया। पूर्ण रूप से उसका हिंदू नाम बनाए रखते हुए उसके जरिए बघाड़ू के चार सगे भाइयों को जमीन खरीदवाई गई।
उसी के नाम का सहारा लेकन गढ़वा (झारखंड) के मेराल निवासी समुदाय विशेष के दो परिवारों को जमीनें खरीदवाई गईं। नगवां के रहने वाले एक व्यक्ति द्वारा इस महिला के नाम खरीदी जमीन स्टांप के जरिए बेची गई। दावा किया जा रहा है कि अब तक जो जानकारियां सामने आई हैं वह प्राथमिक आंकड़े हैं। जांच में कई और जमीनों की खरीदारी के साथ ही कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।
बघाड़ू में अनुसूचित जनजाति की महिलाओं से शादी रचा कर उनके जरिए जनजातीय समाज की कई जमीनें खरीदने की शिकायत सामने आई है। इसको लेकर की गई एक शिकायत पर शासन स्तर से भी जांच के निर्देश मिले हैं। सभी पहलुओं को गहनता से खंगाला जा रहा है। इसके बाद ही कोई ठोस बात स्पष्ट होगी। - निखिल यादव, एसडीएम दुद्धी।
बघाड़ू में मुस्लिम समाज के एक व्यक्ति ने जनजाति समाज की दो महिलाओं को पत्नी की तरह रखा हुआ है। खुद के परिवार में उन्हें मुस्लिम बताया जाता है। वहीं बैनामे के वक्त उन्हें हिंदू बताते हुए पिता का नाम दर्शाकर जमीनें खरीदी जाती हैं। जमीन खरीदने के बाद उस पर गैर प्रांतों के मुस्लिमों को बसाया जा रहा है। इसकी शिकायत मैंने मुख्यमंत्री से की है। जांच के निर्देश दिए गए हैं। - नंदलाल गुप्ता, जिलाध्यक्ष।
प्रकरण गंभीर है। मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर कड़ी कार्रवाई होगी। - अभिषेक वर्मा, एसपी।