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UP: सोनभद्र खदान हादसा...क्रशर यूनियन ने कहा- कुछ लोगों की गलती का पूरे पत्थर उद्योग को न मिले सजा

Wed, 19 Nov 2025 09:50 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र।

सार

UP Mine Accident: पत्रकारवार्ता में यूनियन ने यह भी कहा कि क्षेत्र में प्रदूषण केवल क्रेशर इकाइयों से नहीं बल्कि तापीय परियोजना और सीमेंट फैक्ट्री जैसी बड़ी इकाइयों से उठने वाली धूल से अधिक होता है, जिन पर कार्रवाई बहुत सीमित रहती है।
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बैठक के दाैरान यूनियन के लोग। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Sonbhadra News: बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र के कृष्णा माइनिंग वर्क्स में गत 15 नवंबर को हुए हादसे दुखद हादसे पर डाला-बिल्ली क्रशर यूनियन ने गहरा दुख जताया है। बुधवार को यूनियन के कार्यालय पर बैठक में मृत मजदूरों के परिजनों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का एलान किया। संघ ने कहा कि यह हादसा पूरे प्रदेश के लिए त्रासदी है, लेकिन पूरा उद्योग क्षेत्र इसके लिए दोषी नहीं है।

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यूनियन के अध्यक्ष अजय कुमार सिंह ने कहा कि यह घटना प्रकृति की अचानक मार थी। हादसे के बाद से ही क्रशर यूनियन पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है। बताया कि रेस्क्यू कार्य के दौरान व्यवस्था, सहायता और परिवारों के समर्थन में यूनियन लगातार सक्रिय रहा। 

मृतक के परिवारों को पांच लाख रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की गई। सरकार से मिलने वाली सभी मदों की धनराशि दिलाने की जिम्मेदारी यूनियन अपने ऊपर ले रही है। ग्राम पंचायत प्रधानों को यूनियन के संपर्क नंबर दिए गए हैं ताकि किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई में परिवारों को कठिनाई न हो। 

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जताया दुख

कहा कि हादसा दुखद है, लेकिन कुछ व्यक्तियों की त्रुटि के आधार पर पूरे पत्थर उद्योग को कठघरे में खड़ा करना उचित नहीं है। अधिकांश क्रशर और खदानें निर्धारित नियमों, सुरक्षा मानकों और शाम पांच से रात दस बजे तक बंदी आदेश का पालन करती हैं। 

यूनियन ने स्पष्ट किया कि जो नए खदान क्षेत्र हैं, उनमें बेंचिंग सहित सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत पालन किया जा रहा है। पुराने समय में दिए गए कुछ लीज क्षेत्रफल कम होने के कारण बेंचिंग कई जगह व्यावहारिक रूप से संभव नहीं हो पाती, पर सुरक्षा के मानक बनाए रखते हुए खनन कार्य चलता है। 

यूनियन ने यह भी कहा कि यदि कोई इकाई नियमों का पालन नहीं करती, तो उसके खिलाफ प्रशासन को सख्ती करनी चाहिए और यूनियन इसमें सहयोग करेगी। प्रेस वार्ता में यूनियन ने बिजली समस्या, ओवरलोड नियंत्रण, परिवहन व्यवस्था, मजदूरों के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन और नियमित पानी छिड़काव जैसी मांगें भी रखीं।

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