विवादित जमीन आराजी संख्या 3181, रकबा 0.0632 हेक्टेयर यानी पांच विश्वा है। इसे राजनाथ गोंड से खरीदा गया था। आरोप है कि बाद में सुंदरी निवासी जाकिर हुसैन, मुस्तकीम अंसारी, गुलाम सरवर और मुहम्मद इमरान को वहां मकान-दुकान बनाकर रहने के लिए दे दिया गया। शिकायतकर्ताओं ने दावा किया कि जमीन खरीदने में कुंती के नाम का इस्तेमाल किया गया और संबंधित जमीन से उनका वास्तविक लेना-देना नहीं है।
बैनामा शून्य घोषित, जमीन ग्राम सभा में निहित करने का आदेश : एसडीएम अशोक कुमार गुप्ता की अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जमीन का हस्तांतरण उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 99 के प्रावधानों के विपरीत है। न्यायालय ने संबंधित जमीन को धारा 104 और 105 से बाधित मानते हुए ग्राम सभा बघाड़ू में निहित करने का आदेश दिया।
राजस्व टीम की जांच के बाद शुरू हुई सुनवाई
शिकायत पर राजस्व टीम ने बघाड़ू पहुंचकर जांच की थी। जनजाति समाज के बाबूलाल, ललित सिंह, मुरारी प्रसाद, अमृत सिंह, अवधेश सिंह, भिखारी और जीत प्रसाद ने बयान दर्ज कराए। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि कुंती के नाम जमीन खरीदकर दूसरे लोगों को दे दी गई। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कुंती जनजातीय परंपराओं का पालन नहीं करती थी। इसके बाद मामले में सुनवाई शुरू हुई।
भूमि हस्तांतरण के नियमों पर हुई बहस
एसडीएम न्यायालय में कुंती की ओर से दलील दी गई कि दूसरे धर्म के पुरुष से शादी करने पर जाति नहीं बदलती। वहीं, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने प्रमाणपत्र बनवाने और जमीन खरीदने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 341(3) और उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 99 का हवाला दिया। मामले में पहले रजिया और नन्हकी से जुड़े प्रकरणों के फैसलों का भी उल्लेख किया गया।
दूसरे धर्म में शादी-निकाह के बाद हिंदू धर्म का नहीं लिया जा सकता लाभ : शासकीय अधिवक्ता
एसडीएम न्यायालय में सुनवाई के दौरान कुंती की तरफ से दलील दी गई कि दूसरे धर्म के पुरुष से शादी/निकाह करने के बाद भी जाति नहीं बदलती। इस पर सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने आपत्ति प्रस्तुत की कि शादी 2009 में हो चुकी थी। बावजूद इसके गलत नीयत से छत्तीसगढ़ के बलरामपुर से एसटी का जाति प्रमाणपत्र बनवाया गया।
जाति दूसरे धर्म में शादी करते ही बदल चुकी है, क्योंकि मुस्लिम धर्म में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति का कोई वर्ग ही नहीं है। संविधान की धारा 341(3) का हवाला देते हुए दावा किया गया कि जैसे ही कोई महिला किसी अन्य धर्म (सिख, जैन के अतिरिक्त) में शादी करेगी उसे हिंदू धर्म में रहने पर प्राप्त होने वाले अधिकार समाप्त हो जाएंगे। यूपी से कोई जाति प्रमाणपत्र जारी नहीं है। उनके दोनों बेटे भी मुस्लिम धर्म से हैं।
आदेश के क्रम में संबंधित जमीन को ग्राम समाज के खाते में दर्ज करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जमीन पर बने मकान और अन्य निर्माणों के संबंध में निर्धारित अवधि के बाद अलग से प्रक्रिया अपनाई जाएगी। - अशोक कुमार गुप्ता, एसडीएम दुद्धी