सोनभद्र। चंदौली की सीमा से सटे सदर कोतवाली क्षेत्र के जिगना गांव स्थित मुर्गी फार्म में सोमवार को छापा मारकर पुलिस ने अंतरजनपदीय जुआ अड्डे का भंडाफोड़ किया। इस दौरान 22 लोगों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे और फड़ से 824000 रुपये बरामद किए गए। जुआरियों की एक स्कार्पियो, एक बोलेरो और चार बाइक को सीज कर दिया गया।
राबर्ट्सगंज कोतवाली में पुलिस अधीक्षक आशीष श्रीवास्तव ने मंगलवार को बताया कि सोमवार की शाम मुखबिर से सूचना मिली कि जिगना स्थित एक मुर्गी फार्म में जुआ खेला जा रहा है। फोर्स के साथ सिटी सीओ राजकुमार त्रिपाठी, कोतवाल अंजनी कुमार राय, एसओजी प्रभारी अमित त्रिपाठी, स्वॉट टीम के प्रभारी प्रदीप कुमार सिंह, राबर्ट्सगंज चौकी इंचार्ज योगेंद्र सिंह, दारोगा नरेंद्र राय मौके पर पहुंचे और घेराबंदी कर 22 जुआरियों को गिरफ्तार कर लिया। फड़ से 789200 रुपये, ताश के 52 पत्ते मिले। गिरफ्तार जुआरियों में जिगना निवासी राम सिंह, धुरिया निवासी रमेश मौर्या, चवना निवासी कमलेश जायसवाल, जोगिनी निवासी बच्चे लाल यादव, ओबरा निवासी लालजी यादव, एलाही निवासी नागेंद्र सिंह, श्याम सुंदर सिंह, बिल्ली-मारकुंडी निवासी सौरभ सिंह, भोला राम प्रजापति, केकराही निवासी कोमल केशरी, जमशीला शक्तिनगर निवासी जगनायक सिंह, लखनपुरवा निवासी रविंद्र सिंह, लोहबंद निवासी रामजनम यादव, बघाड़ू निवासी राकेश जायसवाल, उपरी निवासी राजेश जायसवाल, मिर्जापुर जिले के अहरौरा थाना क्षेत्र के बाराडीह निवासी रामदेव बिंद, लखनपुरवा निवासी भीम सोनकर, चदईपुर निवासी हरिमोहन सिंह, नारघाट निवासी राजेंद्र जायसवाल, बथुआ निवासी कृष्णानंद अग्रहरि, बड़की पट़टी अहरौरा निवासी सुरेश सोनकर और विजय सोनकर शामिल हैं। इनके कब्जे से 34800 रुपये बरामद हुआ है। कोतवाली की तहरीर पर जुआरियों के खिलाफ जुआ अधिनियम के तहत केस दर्ज कर चालान कर दिया गया।
गहन जांच हो तो कई सफेदपोश होंगे बेनकाब
सोनभद्र। जिगना स्थित जुआ अड्डे के संचालन को लेकर गहनता से छानबीन हो तो कई सफेदपोशों के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। जुआरियों के कोतवाली पहुंचते ही कुछ नेताओं ने मामले को मैनेज कराने का प्रयास किया लेकिन बात नहीं बन पाई। इससे यह बात सामने आई है कि जुआरियों को कुछ नेताओं की भी शह है। कुछ पुलिसकर्मियों के संलिप्त होने की भी बात चर्चा में है। बता दें कि इससे पहले बीजपुर थाना क्षेत्र में अंतरराज्यीय जुआ अड्डा संचालन का भंडाफोड़ हुआ था जिसमें स्थानीय स्तर पर कुछ नेताओं और पुलिस कर्मियों पर संरक्षण देने की बात सामने आई थी। इसको लेकर कार्रवाई भी आगे बढ़ी थी लेकिन पूर्व में तैनात रहे एसपी के स्थानांतरण के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।