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UP News: सोनभद्र में तीन साल में 199 लोगों की सर्पदंश से मौत... अस्पतालों से लंबी दूरी और झाड़-फूंक बनी वजह

Sat, 13 Jun 2026 03:31 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र।

सार

Sonbhadra News: बारिश के मौसम में सर्पदंश का खतरा बढ़ जाता है। सोनभद्र जिले में तीन साल में 199 लोगों ने सर्पदंश से जान गवांई। सबसे ज्यादा घटनाएं जून से सितंबर तक होती हैं। 
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सांप - फोटो : Freepik
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विस्तार
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बारिश का सीजन नजदीक आने के साथ ही सर्पदंश की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। पिछले तीन साल में जिले के 199 लोगों ने सर्पदंश से जान गंवाई है। इसमें 80 फीसदी घटनाएं सिर्फ जून से सितंबर के मध्य की हैं। ज्यादातर मामलों में उपचार की जगह झाड़-फूंक ही मौत की अहम वजह बनी है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि सभी सीएचसी और प्रमुख पीएचसी पर एंटी स्नैक वेनम पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। बावजूद इसके लोगों तक उसकी पहुंच नहीं है। 

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ग्रामीण इलाकों में अव्वल तो लोग इसके प्रति जागरूक नहीं हैं और जो जानते हैं, वह गांव से लंबी दूरी और खराब रास्तों के कारण समय से अस्पताल ही नहीं पहुंच पाते। सोनभद्र प्रदेश में सबसे ज्यादा वन क्षेत्र वाला जिला है। यहां के जंगलों में दुनिया के तीन सबसे खतरनाक सांप भी पाए जाते हैं। लिहाजा सर्पदंश की घटनाएं भी सबसे ज्यादा हैं। 

आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2023-24 में 69 लोगों ने सर्पदंश से जान गंवाई थी। वहीं वर्ष 2024-25 में 62 और 2025-26 में 68 लोगों की मौत हुई है। ये वे मामले हैं, जिनमें पोस्टमार्टम के बाद आपदा राहत कोष से आश्रितों तक आर्थिक मदद पहुंची है। तमाम घटनाओं में लोग पोस्टमार्टम से भी इन्कार कर देते हैं। 
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हर साल बड़ी संख्या में सर्पदंश से हो रही मौतों को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से एंटी स्नेक वेनम अस्पतालों पर उपलब्ध कराए गए हैं लेकिन प्रभावित लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाता। इसकी वजह लोगों में जागरूकता की कमी तो है ही, अस्पतालों से गांवों की लंबी दूरी और खराब रास्ते भी कारण बनते हैं। 

छत्तीसगढ़, झारखंड और मप्र के सीमा पर स्थित गांवों से नजदीकी सीएचसी 25-30 किमी दूर है। आवागमन के निजी साधन न हों तो अस्पताल पहुंचने में ही दो से तीन घंटे का समय लग जाता है। ऐसे में मरीज की जान बचाने के लिए लोग नजदीकी झाड़-फूंक करने वालों की शरण लेने को विवश होते हैं।

30 किमी दूर चोपन में अस्पताल
मध्य प्रदेश की सीमा से सटा जुगैल जिले का सबसे बड़ा गांव है। करीब 35 किमी क्षेत्रफल में फैले इस ग्राम पंचायत में 60 से अधिक टोले हैं। यहां की सबसे नजदीकी सीएचसी चोपन में है। इसकी दूरी जुगैल मुख्य गांव से 30 किमी है। अन्य टोलों से दूरी 40 से 45 किमी से भी ज्यादा है। नेटवर्क विहीन इस गांव में आवागमन के साधन भी नहीं हैं। कई टोलों तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता नहीं है। गांव के दिनेश गोंड, राजकुमार का कहना था कि जब तक अस्पताल जाएंगे, दो-तीन घंटे लग जाते हैं। ऐसे में सर्पदंश की घटना होने पर अस्पताल तक पहुंचने की सोचते भी नहीं हैं। झाड़-फूंक कराना मजबूरी है।

सीधा रास्ता नहीं, घूमकर जाने में लगते हैं दो घंटे
छत्तीसगढ़ सीमा पर स्थित दुद्धी का बरखोहरा, बैरखड़ गांव से सीएचसी 28-30 किमी दूर है। बरखोहरा के प्रधान सूरजमन यादव बताते हैं कि रास्ता इतना खराब है कि यह दूरी तय करने में कम से कम दो घंटे लगते हैं। विंढमगंज पीएचसी पहुंचने में भी काफी दिक्कत है। ऐसे में सर्पदंश की स्थिति में ग्रामीण मजबूरी में ओझा के पास जाते हैं। इसमें कई बार जान भी चली जाती है। वहीं बैरखड़ के प्रधान उदय पाल का कहना था कि अमवार पीएचसी तो सिर्फ सात किमी पर ही है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए नदी पार करने का रास्ता नहीं है। करीब 35 किमी घूमकर जाने में काफी वक्त लगता है।

इन क्षेत्रों में भी दिक्कतें
अनपरा के जोगेंद्रा, धुर्वाह, कुलडोमरी आदि गांवों की संयुक्त चिकित्सालय डिबुलगंज से दूरी भी 20-25 किमी है। इसी तरह कोन के चकरिया, चांची, बसुहारी, बागेसोती, नगवां में मांची, खोड़ैला, बड़ैला, मड़पा, घोरावल के मूर्तिया, परसौना, तेंदुहार, कम्हारी, ढोलो, उभ्भा आदि गांवों से नजदीकी सीएचसी की दूरी 30 किमी से ज्यादा है। बभनी, म्योरपुर, दुद्धी ब्लॉक में भी ऐसे गांवों की संख्या अधिक है। इन गांवों तक आवागमन के पर्याप्त साधन भी नहीं हैं। नतीजा अस्पताल आने से पहले ही जान चली जाती है।
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एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता
वर्ष                         प्रारंभिक स्टॉक     प्राप्त मात्रा जारी मात्रा शेष स्टॉक
2023- 24             430             3290             2177             1543
2024-25   1543   3280             4014             809
2025-26 809             14200             8128             6881
अप्रैल 2026 से जून 2027 6881                         1500             1520  6861
जारी मात्रा का मतलब सीएचसी-पीएचसी को आवंटित एंटी स्नैक वेनम है और स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध एंटी स्नैक वेनम शेष स्टॉक है।       
 
क्या बोले अधिकारी

सर्पदंश से बचाव के लिए सभी प्रमुख अस्पतालों पर एंटी स्नेक वेनम की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इसका लाभ पहुंचे, इसके लिए ग्राम पंचायत स्तर पर जनजागरूकता के लिए कोटेदार, एएनएम, आंगनबाड़ी केंद्र, स्कूल पर जागरूकता से जुड़े पोस्टर, पंफलेट लगवाए जा रहे हैं। लोगों को झाड़-फूंक से बचते हुए नजदीकी अस्पताल पहुंचने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके अलावा भी जो जरूरी कदम होंगे, उठाए जाएंगे। -चर्चित गौड़, डीएम 
 
सभी सीएचसी ब्लॉक पीएचसी सहित अन्य प्रमुख अस्पतालों पर पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध कराए गए हैं। आशा-एएनएम सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों को ग्राम स्तर पर जन जागरूकता के लिए कहा गया है, ताकि लोग झाड़-फूंक की बजाए अस्पताल आकर उपचार कराएं। -डॉ. रमेश मिश्रा, सीएमओ 

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