ओबरा। क्षेत्र के बिल्ली मारकुंडी स्थित कृष्णा माइनिंग की खदान में हादसे के 24 घंटे बाद भी राहत कार्य में लगी टीमों को खास सफलता नहीं मिली। मलबे में दबे बताए जा रहे 15 मजदूरों में से अब तक सिर्फ एक का शव मिला है।
बाकी की तलाश जारी थी। उनके परिवार के लोग खदान क्षेत्र के बाहर डेरा डाले हुए हैं। हादसे के बाद किसी का पति लापता हुआ है तो किसी का पिता, बेटा और भाई गायब है। वक्त बीतने के साथ उनके जिंदा बचने की उम्मीद कम होती जा रही हैं, मगर हर कोई भगवान से चमत्कार की आस लगाए बैठा रहा।
पनारी ग्राम पंचायत के करमसार टोला की रहने वाली सुनीता के आंसू नहीं थम रहे थे। हादसे के बाद उसके दो भाई इंद्रजीत (32) और संतोष (30) लापता हैं। तीसरे भाई छोटू का दावा है कि दोनों भाई खदान में ही काम कर रहे थे और वह मलबे में दब गए। संतोष कंप्रेशर ड्रीलिंग का काम करता है।
उसके तीन बच्चे शुभम, आकांक्षा और अन्नू हैं, जिनकी उम्र 10 साल से भी कम है। पत्नी गायत्री देवी बेसुध पड़ी थीं। इंद्रजीत के चार बच्चे दीपक, किशन, ट्विंकल और सोना हैं। पत्नी पार्वती देवी पति का नाम लेकर बिलख रही थी। उसे लोग यह कहते हुए ढांढस बंधा रहे थे कि भगवान सबकी रक्षा करेंगे। सुनीता ने बताया कि मजदूरी कर दोनों भाई अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। शनिवार को भी दोनों मजदूरी के लिए आए थे, लेकिन हादसे के बाद से उनका पता नहीं है।
रात 11 बजे सूचना पाकर पहुंचीं पनारी गांव के खड़री टोला निवासी बचिया देवी के पति राम खेलावन (40) भी खदान में मजदूरी करने आए थे। देर रात तक घर नहीं पहुंचे तो घरवालों ने तलाश शुरू की। इसी बीच उन्हें हादसे की खबर मिली। रामखेलावन को तीन बेटियां और एक बेटा है।
पड़री टोला के ही कृपाशंकर (32) खदान में हेल्पर का काम करते थे। पत्नी सुरसतिया देवी का कहना था कि कई साल वह काम करते आ रहे हैं। शनिवार को भी घर से मजदूरी के लिए निकले, लेकिन घर नहीं लौटे। शाम पांच बजे जब हादसे की जानकारी हुई तो वह भागती हुई यहां पहुंची। तब से लगातार अफसरों से सवाल पूछ रही थीं, मगर सिर्फ यही जवाब था कि कोशिश जारी है। कृपाशंकर को दो बेटियां खुशबू और सरिता हैं।
कोन थाना क्षेत्र के कचनरवा निवासी रवींद्र उर्फ नानक भी साथियों के साथ इसी खदान में काम कर रहा था। बेटे की तलाश में पहुंचे पिता राजकुमार का रो-रोकर बुरा हाल था। ऐसे ही कई अन्य परिवार भी घटनास्थल के आसपास तमाम सवाल लिए अपनों को ढूंढते रहे, मगर उनकाे जवाब देने वाला कोई नहीं था। अलबत्ता पुलिस-प्रशासन के लोग उन्हें व्यवस्था प्रभावित हाेने की दलील देकर दूर भेजने में लगे रहे।