सोनभद्र। जिले में जुगाड़ सिस्टम से संचालित होने वाले अस्पतालों-पैथालाजी सेंटरों की भरमार है। काफी कम संख्या में सर्जन और गिने-चुने एनेस्थेटिक हैं। बावजूद कहीं बगैर डिग्री तो कहीं दूसरे की डिग्री लगाकर नर्सिंग होम सरीखे अस्पतालों का संचालन किया जा रहा है। इस तरह के कई मामले सामने भी आए। कार्रवाई के नाम पर तात्कालिक सक्रियता भी दिखी। बाद में मसला ठंडे बस्ते में चला गया।
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केस एक::
जिला मुख्यालय स्थित एक अस्पताल में सेवाएं दे रहे डॉ. सलिल प्रकाश सिंह ने एसपी और सीएमओ को पत्र भेज शिकायत की थी कि तीन सालों से उनकी जानकारी के बगैर, उनकी डिग्री का इस्तेमाल कर घोरावल में पैथालाॅजी का संचालन किया जा रहा है। पुलिस ने भी रिपोर्ट मांगी। बाद में एसपी के निर्देश पर मुकदमा दर्ज हुआ लेकिन स्वास्थ्य विभाग चुप्पी साधे रहा।
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केस दो::
जुलाई 2024 में धर्मशाला चौक के पास कम्हारी एरिया में आपरेशन से प्रसूता की मौत का मामला सामने आया। आरोप लगे कि बगैर डिग्री वाले व्यक्ति ने ऑपरेशन कर दिया। जांच के दौरान अस्पताल प्रबंधन की तरफ से एक सर्जन की डिग्री प्रस्तुत की गई। पता चला कि संबंधित सर्जन सरकारी संस्थान की नौकरी में है। एक अन्य मामले में उसी सर्जन से जुड़ा गलत शपथ पत्र का भी मामला सामने आया। नोटिस भी जारी हुई लेकिन बाद में कवायद ठंडी पड़ गई।
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केस तीन::
पिछले माह कोन में सगे भाइयों की ओर से बगैर डिग्री-बगैर पंजीयन हास्पीटल एवं सर्जिकल सेंटर संचालन का मामला सामने आया। दोनों गिरफ्तार कर जेल भी भेजे गए लेकिन ऐसे कितने अस्पताल संचालित हो रहे, इसको लेकर कोन सहित कुछ जगहों पर चेकिंग दर्शाते हुए चुप्पी साध ली गई।
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वर्जन
जिले में ऐसे तमाम अस्पताल संचालित है जो मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया के प्रावधानों की अनदेखी कर रहे हैं। बोर्ड तो ट्रामा सेंटर का लगा है लेकिन किस तरह के विशेषज्ञ डॉक्टर चाहिए संचालक को ही पता नहीं है। कहीं बगैर डिग्री अस्पतालाें का संचालन किया जा रहा है तो कहीं दूसरे की डिग्री लगाकर अस्पताल का पंजीयन करा लिया जा रहा है। इस पर रोक के लिए प्रभावी अभियान चलाया जाए। -कौशल शर्मा, जिलाध्यक्ष उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन।
इस तरह की जो भी शिकायतें आई हैं जांच कर कार्रवाई की गई है। गलत तरीके से अस्पताल का संचालन न होने पाए इसके लिए लगातार चेकिंग-अभियान चलाया जा रहा है। - डॉ. जीएस यादव नोडल प्राइवेट चिकित्सालय।