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Sonebhadra News: नाबालिग बेटियाें के छह गुनहगारों को हर महीने मिली सजा

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सोनभद्र। नाबालिग बेटियों के साथ अपराध करने वालों को किसी तरह की रियायत नहीं मिली है। अदालत ने ऐसे मामलों की न सिर्फ तेजी से सुनवाई की बल्कि कड़ी से कड़ी सजा भी सुनाई है। विशेष न्यायाधीश पाक्सो कोर्ट ने पिछले पांच सालों में 300 से अधिक मामलों का निस्तारण करते हुए दोषियों को दंडित किया है।
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इस साल आठ महीने में 42 मामलों में सजा सुनाई गई है। किसी को मृत्युदंड दिया तो किसी को उम्रकैद से दंडित किया। महज 54 दिनों में ही सुनवाई की प्रक्रिया पूरी कर अदालत ने फैसला सुनाया है। निर्णय के लिए जिन बातों को आधार बनाया गया है। वह भी कड़ा संदेश देने वाले साबित हुए हैं। महज पांच सालों में जहां 300 से अधिक प्रकरणों का निबटारा किया गया है।

केस एक::
जनवरी 2013 में विंढमगंज थाना क्षेत्र में सात साल के मासूम के साथ दुष्कर्म करने के बाद स्कार्फ से गला दबाकर हत्या कर दी गई। हैवानियत दिखाने वाले शहजाद ने खुद को मुस्लिम होने के नाते स्वयं को फंसाए जाने की खासी दलील दी लेकिन सामने आए साक्ष्यों, रिपोर्टों और डीएनए के मिलान ने सारी दलीलों को खारिज कर दिया। नवंबर 2021 में मृत्युदंड की सजा सुनाई गई।
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केस दो::
नवंबर 2020 में बीजपुर थाना क्षेत्र में कलियुगी मामा ने सात वर्षीय चचेरी भांजी को बिस्किट दिलाने के बहाने ले जाकर उसके साथ उसके साथ दुष्कर्म और कुकर्म का क्रम तब तक जारी रखा। जब तक उसकी मौत नहीं हो गई। न्यायालय ने इसे जघन्यतम मामला माना और दो साल से भी कम समय में सुनवाई कर दोषी शिवम को फांसी के फंदे पर तब तक लटकाया जाए जब तक मृत्यु न हो जाए... की सजा सुनाई।
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केस तीन::
मई 2018 में अनपरा थाना क्षेत्र स्थित हनुमान मंदिर दर्शन के लिए अपने मंगेतर के साथ गई किशोरी के साथ दरिंदगी की वारदात सामने आई थी। मंगेतर को हाथ-पैर बांध कर जंगल में छोड़ दिया गया था और नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। डेढ़ साल से भी कम समय में सुनवाई पूरी कर सभी आठों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।

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पाॅक्सो कोर्ट की स्थापना के बाद सुनवाई में आई तेजी
वर्ष 2020 में जिले में पॉक्सो कोर्ट की स्थापना की गई थी। उसके बाद से सजा और प्रकरणों के निबटारे दोनों में तेजी आई है। पांच माह में 300 से अधिक मामले निबटाए गए हैं। इस वर्ष महज आठ माह 20 दिन के भीतर 42 मामलों में दोषियों को सजा सुनाई गई । इसमें दो मामलों में आजीवन कारावास और 12 मामलों में 20-20 वर्ष कारावास की सजा शामिल है।
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किसी केस को 54 तो किसी को 120 दिन में निबटारे का बनाया रिकार्ड :

सबसे तेज सुनवाई का रिकार्ड दुद्धी कोतवाली क्षेत्र में स्कूल जा रही छात्रा से हुई छेड़खानी मामले का है। इसके लिए अजमेरूद्दीन सहित चार दोषियों को तीन-तीन वर्ष कारावास के तहत सजा सुनाई गई थी। वहीं चोपन थाना क्षेत्र से जुड़े मामले में आरोप बनने के बाद महज 120 दिन के भीतर सुनवाई पूरी करते हुए दुष्कर्म के दोषी राजन उर्फ रज्जन को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

वर्जन::
पॉक्सो कोर्ट स्थापित होने के बाद नाबालिग से दुष्कर्म-छेड़छाड़ के दोषियों को सजा और इससे जुड़े प्रकरणों के निबटारे में खासी तेजी आई है। जिस तरह से मासूमों के साथ दुष्कर्म-हत्या के जघन्यतम मामले में मृत्युदंड और कई मामलों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है वह दूषित मनोवृत्ति वालों को कड़ा संदेश देने वाला है। -दिनेश प्रसाद अग्रहरि, शासकीय अधिवक्ता सोनभद्र।
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