निर्माणाधीन पुल का शटरिंग गिरा, एक श्रमिक की मौत
घटना से क्षुब्ध ग्रामीणों ने पुलिस को शव ले जाने से रोका
गैस कटर से सरिया काट कर शव बाहर निकाला गया
एडीएम, एएसपी ने घटनास्थल पर पहुंच कर मदद का भरोसा दिलाया
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संवाद न्यूज एजेंसी
ओबरा। चोपन-सिंगरौली रेल मार्ग के हो रहे दोहरीकरण के दौरान ओबरा डैम स्टेशन व फफराकुण्ड स्टेशन के बीच कड़िया में बनाए जा रहे पुल निर्माण की शेटरिंग गिरने से शानिवार को एक मजदूर राजू (22) की मौत हो गई, जबकि दूसरा श्रमिक घायल हो गया। हादसे की जानकारी मिलते ही काफी संख्या में लोग पहुंच गए। पुलिस ने गैस कटर से सरिया को कटवा कर श्रमिक का शव बाहर निकलवाया। मृतक, घायलों के घरवाले और ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग को लेकर पुलिस को शव पोस्टमार्टम के लिए ले जाने से रोक दिया। एडीएम और एएसपी ने घटनास्थल पर पहुंच कर नाराज लोगों से बातचीत की। अधिकारियों ने मृतक के आश्रितों और घायल को हरसंभव मदद दिलाने का भरोसा दिलाया।
घटनास्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि पुल निर्माण में 12 मजदूर शटरिंग कार्य कर रहे थे। दोपहर करीब 12.40 बजे श्रमिक तार बांधने का कार्य कर रहे थे। उसी वक्त शटरिंग की पाइप व मोटी-मोटी सरिया भरभरा कर गिर पड़ी। सरिया के नीचे तीन मजदूर दब कर मदद की गुुुहार लगाने लगे। शोर-शराबा सुनकर आसपास के गांव के लोग पहुंच गए और घायलों की मदद करने में जुट गए। लेकिन तब तक राजू (22) पुत्र अमृतलाल निवासी अरंगी टोला बहेरा की मौत हो गई। वहीं टोला बहेरा निवासी सुरेंद्र (20) पुत्र लालसा व विजय (19) पुत्र दद्दन घायल हो गए।।दोनों घायलों को एंबुलेंस से चोपन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। उधर, घटना की जानकारी मिलते ही फोर्स के साथ एडीएम योगेंद्र बहादुर सिंह, एएसपी ओपी सिंह, एसडीएम सदर यमुनाधर चौहान, क्षेत्राधिकारी ओबरा भाष्कर वर्मा, ओबरा थाना प्रभारी शैलेश कुमार राय, चोपन थाना प्रभारी नवीन तिवारी आदि पहुंच गए। एडीएम ने मौके पर मौजूद ग्रामीणों से घटना की जानकारी लेने के बाद पुल निर्माण के कार्य में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही। समाचार लिखे जाने तक पुलिस फोर्स और अधिकारी घटनास्थल पर ही डटे रहे।
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इनसेट
पुलिस को करना पड़ा विरोध का सामना
संवाद न्यूज एजेंसी
ओबरा। कड़िया में पुल निर्माण के दौरान शटरिंग गिरने से एक मजदूर की हुई मौत के बाद ग्रामीण रेल प्रशासन पर लापरवाही बरतने के कारण हादसा होने का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे। पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस को लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा। मृतक के भाई राजेन्द्र, कप्तान व अफसर ने कार्यदायी संस्था पर मानक से कम मजदूरी देने व सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर कार्य कराने का आरोप लगाते हुए मुआवजे की मांग की और अपने भाई का शव पुलिस को पोस्टमार्टम के लिए देने से इनकार कर दिया। मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में परिजनों व कंपनी के जिम्मेदारों के बीच हुई वार्ता में आपसी सहमति से कार्यदायी संस्था की तरफ से मृतक के परिजन को चार लाख नकद देने का आश्वासन दिया गया। साथ ही 50 हजार रुपये अंतिम संस्कार करने के लिए मौके पर दे दिया गया। इसके अलावा इन्श्योरेंस से लगभग 15 लाख दिलाने की बात कही गई। वहीं घायलों को स्वस्थ होने तक मजदूरी देने व कार्यदायी संस्था की तरफ से इलाज कराने का आश्वासन भी दिया गया। इसके बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।?