शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाए जाने की मांग को लेकर सोमवार को प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अशोक सिंह के नेतृत्व में शिक्षामित्रों ने कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन किया।
मांगों के समर्थन में शिक्षामित्र नारेबाजी करते हुए मुख्यालय पहुंचे। यहां शिक्षामित्र इच्छा मृत्यु प्रदान किए जाने की मांग कर रहे थे। हाईकोर्ट इलाहाबाद के आदेश के विरोध में शिक्षामित्रों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कहीं। इस दौरान शिक्षामित्रों ने एसडीएम हर्षदेव पांडेय प्रधानमंत्री के नाम मांगपत्र सौंपा।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 2000 से प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने में शिक्षामित्र योगदान दे रहे हैं।
शिक्षामित्रों के त्याग और परिश्रम को देखते हुए वर्ष 2008 में तत्कालीन बसपा सरकार ने एनसीटीई से विधिक रूप से अनुमति लेकर दो वर्षीय बीटीसी प्रशिक्षण कराने के लिए कार्ययोजना बनाई।
इसी क्रम में वर्ष 2011 में शिक्षामित्रों का दो वर्षीय बीटीसी प्रशिक्षण आरंभ हुआ। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद वर्ष 2014 में सपा सरकार ने शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक पद पर समायोजित करने प्रक्रिया शुरू की।
जून, 15 तक 172000 शिक्षामित्रों में से लगभग 135000 शिक्षामित्र सहायक अध्यापक पद पर समायोजित हो चुके हैं। लेकिन एनसीटीई के सौतेले व्यवहार से उच्च न्यायालय ने सहायक अध्यापक पद पर समायोजन रद्द करने का आदेश दिया है।
कहा कि 15 वर्षों से प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था के रीढ़ बने शिक्षामित्र बेकार हो गए हैं और लाखों परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए है। इस मौके पर रविंद्र चौधरी, बिमलेश सिंह, मुकेश सिंह, मनोज पांडेय, प्रमोद, श्रवण कुमार, पूजा, स्नेहा, विनोद पांडेय, अर्चना, नेहा शामिल रहीं।