बभनी। पहचान की संकट से जूझ रहे वनवासियों की लोक कला और संस्कृति को कारीडांड़ चपकी का सेवा समर्पण संस्थान सेवाकुंज आश्रम बुलंदी पर पहुंचा रहा है। सेवाकुंज आश्रम के सहयोग से आदिवासी समाज अपनी लोक कला कर्मा नृत्य, सैला नृत्य को राष्ट्रीय फलक न सिर्फ पहुंचा रहे हैं बल्कि इसकी प्राचीनता से लोगों को रूबरू करा रहे हैं।
सेवाकुंज आश्रम बनवासियों की कला को संजोने का कार्य करते हुए आश्रम में बैगा पुजारियों, गोंड़, चेरों आदि समाज के पुजारियों को आमंत्रित कर उनकी संस्कृति को समृद्धि करने में लगा है। आदिवासी समाज दशहरा, दीपावली, अनंत चतुर्दशी, नवरात्र आदि अवसरों पर कर्मदेव की पूजा जन्म जन्मांतर से करते आ रहे हैं। आदिवासियों का जीवन हमेशा से कलात्मक रहा है जो वर्तमान में लुप्त हो रहा था। आदिवासियों का सैला नृत्य, कर्मा नृत्य अपने आप में आकर्षक रहा है। आदिवासी समाज आज भी कर्मदेव की पूजा करता है और करमडाड को अपने आंगन में खड़ा कर पूरी रात उनकी पूजा करते हुए कर्मा खेलते हैं। सेवाकुंज आश्रम बनवासियों, आदिवासियों के इसी धरोहर को बचाने में असरदार साबित हो रहा है। आश्रम बनवासियों को शिक्षा, संस्कृति के साथ साथ उनके रहन, सहन खान पान पर भी खासतौर से ख्याल रखा है। वर्तमान समय में सेवाकुंज आश्रम में जिले के संपूर्ण विकास खंड से जनजातीय वर्ग के बच्चे छात्रावास में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
बभनी के सेवा कुंज आश्रम में 14 मार्च को संभावित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के आगमन को लेकर तैयारी तेजी से चल रही है। जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन जहां व्यवस्थाओं को मुकम्मल करने में जुटा है वहीं आरम के लोग भी अपने तरीके से तैयारी कर रहे हैं। महामहिम के स्वागत में वनवासी समाज के लोग अपने नृत्य की तैयारी में लगे हुए हैं। यहां करमा, शैला सहित अन्य नृत्य प्रस्तुत करने की तैयारी है। हालांकि आरम की ओर से कार्यक्रम की रूपरेखा जारी नहीं की गई है। एक-दो दिन में विस्तृत रूपरेखा तैयार कर ली जाएगी।