जिले में ओबरा, रेणुकूट और कैमूर वन्य प्रभाग की एरिया में आने वाले 421 गांवों में धारा चार से जुड़ी जमीनें फिर से वन विभाग को वापस होगी। इन जमीनों पर खनन पट्टे और गैर वानिकी कार्य के लिए जारी वन विभाग की एनओसी भी निरस्त की जाएगी। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के फैसले के बाद सख्त हुए डीएम सीबी सिंह ने जल्द आदेश के अनुपालन के निर्देश दिए हैं। इससे सीधे तौर पर एक लाख हेक्टेअर से अधिक जमीन और पांच हजार से अधिक लोग प्रभावित होंगे। निरस्तीकरण की जद में कई खनन माफिया और सफेदपोशों के नाम शामिल हैं।
एनजीटी ने भूमिधर में तब्दील की गईं धारा चार की जमीनों को वापस लेकर धारा बीस में विज्ञापित करने का आदेश दिया है। प्रमुख सचिव वन ने भी निर्देश जारी किए हैं। डीएम ने खान अधिकारी, तीनों एसडीएम, डीएफओ ओबरा, डीएफओ कैमूर वन्य जीव प्रभाग, डीएफओ रेनुकूट और वन बंदोबस्त अधिकारी को हर हाल में धारा चार की जमीनों को वापस लेने और खनन एवं गैर वानिकी कार्य के लिए जारी एनओसी निरस्त करने के निर्देश जारी कर दिए। जारी पत्र में ओबरा वन प्रभाग के 94, रेणुकूट वन प्रभाग के 289 और कैमूर वन्य प्रभाग के 38 गांवों में धारा चार की जमीन धारा बीस में विज्ञापित की जानी हैं।
इन सभी गांवों में 18 जुलाई 1994 के बाद कैमूर सर्वे एजेंसी के एडीजे अथवा अन्य किसी सक्षम न्यायालय में धारा चार से संबंधित जितने भी जमीनों के संबंध में निर्णय दिए गए हैं, उन सभी जमीनों को वापस वन में शामिल किया जाना है। यह भी निर्देश दिया है कि इन जमीनों पर खनन या अन्य किसी गैर वानिकी कार्य न होने पाए। एनओसी निरस्त करने के बाद फाइल भी डीएम ने तलब की है।