बिना मान्यता संचालित स्कूलों पर शासन की सख्ती का जिले में असर नहीं है। ग्रामीण इलाकों में दो-तीन कमरों में विद्यालय खोलकर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। जांच और कार्रवाइयों का इन पर कोई भय नहीं है। एक तरफ सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने पर जोर है तो दूसरी ओर बिना मान्यता चल रहे विद्यालय इसमें बाधा बन रहे हैं।
जिले में 2061 परिषदीय विद्यालय और 197 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इसके अलावा सीबीएसई के भी 40 से अधिक विद्यालय चल रहे हैं। इनके अलावा भी ढेरों विद्यालय ऐसे हैं, जिनके पास कहीं से मान्यता नहीं है। इनकी संख्या 100 से भी अधिक है।
दो से तीन कमरे तो कहीं टीनशेड की छत वाले भवन को विद्यालय बना दिया गया है। यहां पढ़ाई कराई जा रही है, जबकि बच्चों का दाखिला किसी दूसरे स्कूल में होता है। रॉबर्ट्सगंज, करमा, दुद्धी, घोरावल, चोपन, कोन सहित अन्य ब्लॉकों में ऐसे विद्यालयों की भरमार है।
बड़े-बड़े पोस्टर लगाकर इन विद्यालयों में दाखिले भी लिए जा रहे हैं, मगर विभागीय जिम्मेदार इससे अंजान बने हुए हैं। पिछले दिनों कोन में बीईओ ने जांच की तो छह विद्यालय बिना मान्यता संचालित पाए गए थे। घोरावल में भी एक विद्यालय में बीईओ पहुंचे तो वहां मान्यता से जुड़ी कोई पत्रावली नहीं थी।
ऐसी ही स्थिति अन्य ब्लॉकों की भी है। नए शिक्षण सत्र की शुरुआत के बाद फिर से इन विद्यालयों का संचालन धड़ल्ले से शुरू हो गया है। शासन की ओर से लगातार ऐसे विद्यालयों को बंद कराने के निर्देश दिए जा रहे हैं, मगर जिले में फिलहाल इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
प्रधानाचार्यों ने भी उठाई मांग
पिछले दिनों डीआईओएस ने माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की बैठक ली थी। इसमें भी बिना मान्यता संचालित विद्यालयों का मुद्दा उठा था। सभी मान्यता प्राप्त वित्तपोषित व राजकीय विद्यालयों के प्रधानाचार्यों ने नामांकन का लक्ष्य पूरा करने के लिए बिना मान्यता चल रहे विद्यालयों को सख्ती से बंद कराने की जरूरत बताई थी। प्रधानाचार्यों का कहना था कि एक तरफ शासन की ओर से अधिक से अधिक प्रवेश लेने का निर्देश जारी किया गया है तो दूसरी तरफ कक्षा 5 व 8 उत्तीर्ण बच्चों को गैर मान्यता वाले स्कूल संचालक अपने झांसे में लेकर प्रवेश ले रहे हैं। प्रबंधक महासभा के जिलाध्यक्ष सुशील कुमार चौबे और प्रधानाचार्य परिषद के जिलाध्यक्ष डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने गैर मान्यता वाले स्कूलों की जांच कर उन्हें बंद कराने की मांग की है, ताकि राजकीय स्कूलों में नामांकन बढ़ सके।
बिना मान्यता संचालित विद्यालयों को चिह्नित कराया जा रहा है। उन्हें नोटिस दी जाएगी। इसके बाद भी संबंधित विद्यालयों को बंद न करने पर उच्चाधिकारियों के निर्देश पर उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी।
-जयराम सिंह, डीआईओएस।